मिलावटखोरी के बाज़ार में बीमार होता भारत

Summary :

आज उपभोक्ता मिलावट, बिना मानक की वस्तुओं की बिक्री, अधिक दाम लेना, गारंटी के बाद सर्विस नहीं देना, ठगी, कम नाप-तौल आदि जैसी समस्याओं से अक्सर घिरे रहते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए ‘उपभोक्ता संरक्षण’ के लिए कई नियम और कानून बनाए गए हैं लेकिन जो लोग गैरकानूनी काम करते हैं उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। चूंकि उपभोक्ता संगठित नहीं होते हैं इसलिए उन्हें हर जगह ठगा जाता है। दोषी व्यक्ति या कम्पनी कानून की नज़र से साफ़ बच निकलते हैं या उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। जिस देश का विश्वगुरु और विकसित भारत बनने का…

आज उपभोक्ता मिलावट, बिना मानक की वस्तुओं की बिक्री, अधिक दाम लेना, गारंटी के बाद सर्विस नहीं देना, ठगी, कम नाप-तौल आदि जैसी समस्याओं से अक्सर घिरे रहते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए ‘उपभोक्ता संरक्षण’ के लिए कई नियम और कानून बनाए गए हैं लेकिन जो लोग गैरकानूनी काम करते हैं उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। चूंकि उपभोक्ता संगठित नहीं होते हैं इसलिए उन्हें हर जगह ठगा जाता है। दोषी व्यक्ति या कम्पनी कानून की नज़र से साफ़ बच निकलते हैं या उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। जिस देश का विश्वगुरु और विकसित भारत बनने का सपना है, वहां यदि दूध, घी, मावा, मसाले, अनाज, मिठाइयां, फल-सब्जियां और यहां तक कि जीवनरक्षक दवाइयां भी मिलावट की शिकार हों तो यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि मानवता के विरुद्ध अपराध है। भारत में मिलावट का कारोबार आज एक संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है। दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और सिंथेटिक रसायनों का प्रयोग, मावे में स्टार्च और रासायनिक पदार्थों की मिलावट, मसालों में रंग और धूल, शहद में चीनी सिरप, खाद्य तेलों में सस्ते तेलों का मिश्रण तथा फलों और सब्जियों को कृत्रिम रसायनों से पकाना आम बात हो गई है। स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब दवाइयों में मिलावट या नकली दवाओं का मामला सामने आता है। असली और नकली वस्तुओं का रहस्य किसी तिलस्म से कम नहीं है।
एक साधारण उपभोक्ता तो फर्क ही नहीं कर पाता कि असली और नकली वस्तु का फर्क क्या है। खुले बाज़ार में बिक रही चीजों के बीच फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। मिलावट के इस उपभोक्तावादी बाज़ार में फल, सब्जी, अनाज, घरेलू इस्तेमाल की चीज़ें, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि वस्तुओं में अक्सर मिलावट की जाती है या नकली चीजें बेचीं जाती हैं और उसके दाम भी पूरे लिए जाते हैं।“मऐसे ‘मिलावटखोरों’ को कोई चिंता नहीं कि इन चीज़ों से समाज के लोग कमज़ोर और बीमार हो सकते हैं। बच्चे हमारा भविष्य होते हैं और हर मां-बाप अपने बच्चे को शारीरिक रूप से मजबूत देखना चाहते हैं। दूध बच्चों के शारीरिक विकास में मदद करता है जिसकी पुष्टि डॉक्टर भी करते हैं लेकिन नकली दूध बनाने वाले इन मौत के सौदागरों को यह एहसास तक नहीं होता कि वे मासूम ज़िंदगियों से खेल रहे हैं। हर वर्ष भारत में होली, दिवाली आदि त्यौहारों पर भारी मात्रा में ‘नकली खोया’ और ‘नकली मिठाइयां’ पकड़ी जाती हैं। एफडीए के कमिश्नर तुकाराम मुंडे काफी चर्चा में हैं। वे नियमों का उल्लंघन करने वाले रेस्टोरेंट और कैंटीन के प्रति सख्त हैं। इसके लिए उनकी काफी तारीफ हो रही है। आम लोग अपनी शिकायतें बताने के लिए उन्हें टैग कर रहे हैं… क्योंकि महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने राज्य में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है। उन्होंने मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक में हजारों संस्थानों की जांच कर नियम तोड़ने वाले दर्जनों होटलों के लाइसेंस निलंबित व रद्द कर दिए हैं। वहीं, रसायनों से बनने वाले नकली दूध और एनालॉग पनीर का उत्पादन करने वाली कई डेयरियों को सील कर दिया है।
बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने लक्जरी यूबी सिटी मॉल की 16वीं मंजिल पर स्थित रूफटॉप लाउंज स्काई लाउंज की रसोई को अस्वच्छ स्थिति में पाए जाने के बाद सील कर दिया। रसोई में सड़ा हुआ चिकन और गाैमांस मिला, साथ ही लगभग 10 दिन पुराना दूध और दही भी पाया गया। व्यापक अभियान के तहत 30 टीमों ने तीन दिनों में 60 होटलों पर छापा मारा और 640 किलोग्राम मांस, चिकन और मछली, 276 किलोग्राम सड़ी हुई या फफूंदी लगी सब्जियां, 45 लीटर एक्सपायर्ड दूध और दही तथा 49 लीटर इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल जब्त किया। इसी तरह दिल्ली के एयरोसिटी स्थित पांच सितारा (फाइव स्टार) होटल जे डब्ल्यू मैरियट और ‘अंदाज दिल्ली’ को निरीक्षण के दौरान कीड़े-मकोड़े पाए गए हैं। एक ऐसे सवाल से शुरुआत करें जो शायद ही कोई ग्राहक पूछता है। किसी होटल को उसके सितारे कौन देता है, और किसलिए?भारत में होटलों को मिलने वाले स्टार होटल और रेस्तरां अनुमोदन एवं वर्गीकरण समिति द्वारा प्रदान किए जाते हैं जो पर्यटन मंत्रालय के अधीन एक निकाय है और इनके लिए आवेदन करना स्वैच्छिक है।
एक समिति सुविधाओं और सेवाओं की एक लंबी सूची के आधार पर इसका मूल्यांकन करती है: कमरों का आकार, साज-सज्जा, रेस्तरां और बार की संख्या, मनोरंजन, लिफ्ट और अतिथि सेवाएं। पर्यटन मंत्रालय के अपने दिशा-निर्देश बताते हैं कि इस मूल्यांकन में आराम और भव्यता का कितना योगदान है। एक बार रेटिंग मिल जाने के बाद, नवीनीकरण से पहले यह कई वर्षों तक मान्य रहती है। भारत की पहचान योग, आयुर्वेद, शुद्ध आहार, नैतिक जीवन-मूल्यों और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की संस्कृति से रही है। यह पहचान तभी सार्थक होगी जब हमारे भोजन, दवाइयों और उपभोग की वस्तुओं में शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो। सुरक्षित भोजन केवल स्वास्थ्य का अधिकार नहीं, बल्कि मानव गरिमा और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। यदि हम आज मिलावट के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का संकल्प लें तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भारत दे सकते हैं। “शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार, मिलावट-मुक्त भारत, विकसित भारत का आधार”, यही 2047 के विकसित भारत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा और यही विश्व समुदाय के समक्ष भारत को एक आदर्श राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा।

Aakash Chopra