पिछले कुछ महीनों से आंदोलन के नाम पर हुड़दंग मचाने और झूठे आरोपों का रोना रोने वाले ‘इंडिया गठबंधन’ ने रविवार को दिल्ली में लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर रैली निकाली। मेरे मन में एक मूल सवाल उठता है कि जिस कांग्रेस ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोट दिया था, उसी कांग्रेस को आज लोकतंत्र की रक्षा की इतनी चिंता आखिर क्यों सता रही है? दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाने वालों को क्या लोकतंत्र की बातें शोभा देती हैं?
विरोधियों को रैलियां निकालने, आंदोलन करने और सरकार की आलोचना करने की पूरी आजादी है। मीडिया के सामने बोलते हुए ‘फेक नैरेटिव’ फैलाने से भी विपक्ष को कोई नहीं रोकता। उनके नेताओं को कोई जबरन जेल में नहीं डाल रहा है। इसके बावजूद लोकतंत्र खतरे में होने का पाखंड किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना और न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास करना लोकतंत्र के मूलभूत मूल्यों को ही चुनौती देने जैसा है। लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है। उसे स्वीकार करने की बजाय देश में अस्थिरता पैदा करने की राजनीति की जा रही हो तो उसका दृढ़ता से जवाब देना ही होगा।
पिछले सप्ताह की दो खबरें विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं। देशभर में हुए विधान परिषद चुनावों के नतीजे घोषित हुए। इनमें एनडीए को शानदार सफलता मिली। कांग्रेस और अन्य छोटे-मोटे विपक्षी दल पिछले कई महीनों से लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। विधान परिषद के चुनाव बैलेट पेपर से ही हुए, इसके बावजूद कांग्रेस को पूरे देश में केवल एक सीट पर जीत मिली और हमेशा की तरह उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा, यहां तक कि कर्नाटक जहां कांग्रेस की सत्ता है, वहां पढ़े-लिखे मतदाताओं ने उनका सूपड़ा साफ कर दिया।
दूसरी बेहद महत्वपूर्ण खबर देश में गरीबी की स्थिति से जुड़ी थी। विश्व बैंक ने ‘पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ नाम से अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया है कि पिछले पंद्रह वर्षों में भारत में गरीबों की संख्या में भारी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में भारत की कुल आबादी में गरीबों का अनुपात 27.1 प्रतिशत था, जो अब घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि गरीबी कम करने की भारत की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज है। आजादी के बाद 6 दशकों तक केवल ‘गरीबी हटाओ’ के नारे देने वाली कांग्रेस के खोखले प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की यह उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
कांग्रेस ने हमेशा गरीबों को केवल अपना ‘वोट बैंक’ समझा। उसे डर था कि यदि गरीबी खत्म हो गई तो उसका राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। कभी आधे पेट सोने वाली वाली जनता को रोटी का सपना दिखाकर भ्रम में बनाए रखना ही कांग्रेस की नीति रही है, उनकी इस नीति में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पिछले 13 वर्षों में पूरी दुनिया में भारत की उज्ज्वल छवि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। गरीबी, राजनीतिक भ्रष्टाचार और परिवारवाद के दलदल में आकंठ डूबे देश को प्रगति और विकास की नई दिशा दी है।
वहीं राहुल गांधी आज भी सड़कों पर उतरकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और फैशनेबल आंदोलन करने वालों, वामपंथी विचारों और विकृत मानसिकता से ग्रस्त लोगों को साथ लेकर चलने तक ही सीमित हैं। यही वजह है कि देशभर के मतदाता आज भी कांग्रेस को नकार रहे हैं। अपनी हार के ऊंचे पहाड़ों की ओर देखने के बजाय दूसरों की हार की छोटी-सी पहाड़ी दिखाकर संतोष करने वाले, विघ्नसंतोषी और संकीर्ण मानसिकता वाले राजनीतिक सहयोगी उन्हें महाराष्ट्र सहित पूरे देश में मिले हैं।
आज तक किस विपक्षी दल के नेता ने सर्वोच्च न्यायालय तक मोर्चा निकालने की बचकानी हरकत की थी ? न्याय मांगने के लिए याचिका दायर कीजिए, अच्छे वकील नियुक्त कीजिए, दलीलें दीजिए, सबूत पेश कीजिए और अपने मुद्दे रखिए। जब न्याय पाने की यह सर्वमान्य न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है, तब सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश का ही इस्तीफा मांगना कांग्रेस का कितना बड़ा राजनीतिक कृत्य है। कांग्रेस का यह काला कारनामा इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो गया है। ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनौती कांग्रेस और कांग्रेस की पूंछ पकड़कर राजनीति करने वालों को कई बार दी गई है, लेकिन आज तक उन्होंने एक बार भी इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया।
बार-बार एक ही आरोप लगाकर उसे सच साबित करने का भ्रम पैदा करना कांग्रेस ने गोबेल्स की नीति के रूप में अपना लिया है। हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना या केरल जैसे राज्यों में जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जीतते हैं, तब उन्हें ईवीएम से कोई शिकायत नहीं होती। वहां चुनाव प्रक्रिया उन्हें पूरी तरह निष्पक्ष लगती है और वे जनता के जनादेश को सिर-माथे पर स्वीकार करते हैं। लेकिन जहां भाजपा और महायुति जीतती है, वहां तुरंत ईवीएम में गड़बड़ी होने का रोना शुरू हो जाता है। जीत मिली तो जनता का समर्थन और हार हुई तो ईवीएम हैक-विपक्ष का यह दोहरा रवैया अब देश की जनता अच्छी तरह समझ चुकी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र 84 वर्ष है। जिस उम्र में उन्हें आने वाली पीढ़ियों को शालीनता और सभ्यता के संस्कार देने चाहिए, उस उम्र में यदि वे स्वयं प्रधानमंत्री के पिता को लेकर अभद्र टिप्पणी करते हैं तो कांग्रेस से किसी अच्छे व्यवहार की अपेक्षा करना व्यर्थ है। यह दोष उस कांग्रेस संस्कृति का है, जिसमें वे पले-बढ़े हैं। उनकी सीख यही रही है कि उनके परिवार से बड़ा कोई नहीं होना चाहिए और किसी दूसरे की तरक्की उनसे देखी नहीं जाती।
दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुक्सान पहुंचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्होंने उन पर विजय पाते हुए देश के किसानों, महिलाओं, विद्यार्थियों और गरीबों के कल्याण के लिए योजनाएं लागू कीं।
बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय राजमार्गों, मैट्रो और नए उद्यमों का व्यापक नेटवर्क तैयार करते हुए देश की औद्योगिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। सैन्य तैयारियों से लेकर वंदे भारत तक, आयुष्मान भारत से लेकर किसान सम्मान निधि तक, हर क्षेत्र में भारत की निरंतर प्रगति हो रही है। यूपीआई के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे का आदान-प्रदान आसान हुआ है। देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 476 गीगावॉट तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क वर्ष 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 1,46,572 किलोमीटर तक पहुंच गया है। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की।
इसके साथ ही भारत चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी उच्च अक्षांश वाले क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना। जनवरी 2025 में 'स्पेडेक्स ' मिशन के तहत अंतरिक्ष में दो उपग्रहों का सफलतापूर्वक जुड़ाव हुआ। इस तकनीक में सफलता हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बना। इससे अंतरिक्ष में, स्वचालित नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रयोगों के क्षेत्र में देश की क्षमता का परिचय मिला। मोदी जी की नीतियों के कारण पिछले 13 वर्षों में देशभर के किसानों को कुल 50 लाख करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष सहायता मिली है।
देश के छोटे और सीमांत किसानों को किसान सम्मान निधि के रूप में चार लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से 24 लाख करोड़ रुपये दिए गए। आज भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दुनिया में भारत का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी कारण हमारा देश सर्वसमावेशी समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन लोगों को यह वास्तविकता स्वीकार नहीं है, वे बौखलाहट में हंगामा खड़ा कर रहे हैं। उनके साथ कुछ विदेशी ताकतें भी खड़ी हैं। उन्हें भारत की बढ़ती हुई ताकत खटक रही है। लेकिन देश में अराजकता फैलाने की उनकी मंशा कभी पूरी नहीं होगी।


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