ऐतिहासिक लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे खासे भाषण के जिस प्रकार से विपक्षी व वामपंथी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें कमतर बताने का यत्न कर रहे हैं, इस से हिंदी का जुमला याद आ गया कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। कोई भी सरकार चाहे कितनी ही मजबूत क्यों न हो, भारत जैसे विशालकाय देश को कामयाबी से चलाना कोई आसान काम नहीं है। प्रधानमंत्री के भाषण की रीलें बनाई गईं, हर बात को लेकर अट्टहास किया गया आदि। लोकतंत्र में यह सब चलता है, मगर प्रधानमंत्री की गरिमा पर आंच नहीं आनी चाहिए, जैसा छात्र आंदोलन में हुआ। एक समय था कि भारतीय राजनीति में कहा जाता था, “इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा।’’ बड़ी जानदार सरकार थी उनकी, मगर उन्हें भी समय-समय पर विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ा, चाहे वह आपातकाल हो अन्य कोई भी विषय थे, इस में कोई दो राय नहीं है कि छात्र आंदोलन और राम मंदिर में चोरी ने सरकार को परेशान किया है।
मोदी जी का कोई विशेष दोष नहीं है, सिवाय इसके कि उन्होंने अपने कुछ मंत्रियों और राम मंदिर के नेताओं पर भरोसा किया। जहां मोदी जी ने धर्मेंद्र प्रधान से पिंड छुड़ाने के लिए अधिक समय लिया और उनके सत्ता पर कोई अन्य सशक्त शिक्षामंत्री को नहीं बिठाया, वहीं छात्रों से बात करने में उन्होंने देर कर दी। वास्तविकता यह है कि इन सभी समस्याओं पर सरकार के पहले से ध्यान दिया होता तो इस प्रकार के हालात नहीं बनते। मोदी के सारे मंत्री व सरकारी अफ़सर यदि मोदी जैसे होते तो आज न तो छात्र सड़कों पर उतरते, न ही राम मंदिर कांड होता। यह भी एक ढका-छिपा और काला पहलू है, इस समाज का कि सभी मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों आदि की दान पेटिकाओं पर हाथ साफ किए जाते रहे हैं, मगर राम मंदिर में ऐसा हुआ, उसकी कोई माफ़ी नहीं है। फिर, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी, बौद्ध आदि संप्रदायों की समस्याओं पर प्रधानमंत्री को सही जानकारी देने वालों की कमी प्रतीत हो रही है। वैसे जेन जी के उत्थान के संबंध में जो सात घोषणाएं उन्होंने की हैं, यदि पिछले 12 वर्ष में एक, एक कर के वे इन्हें निपटा देते तो बढ़िया होता, क्योंकि वे जो कहते हैं, करते हैं। मगर इसका अर्थ यह नहीं कि विपक्षी नेता और जिनमें कुछ दागदार नेता भी हैं, प्रधानमंत्री मोदी पर इस प्रकार से प्रहार कर रहे हैं, मानो मुर्दा कफ़न फाड़ कर बोल रहा है। उन्हें हरगिज़ भी यह नहीं भूलना चाहिए कि मोदी ने हर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय समस्या में भारत को उबारा है। बीते 12 वर्ष में मोदी ने बीते प्रधानमंत्रियों के मुक़ाबले में अतुलनीय व प्रशंसनीय कार्य किया है, नरेंद्र मोदी ने। बुनियादी ढांचे में तेज विस्तार किया है, जैसे सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह और एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। भारतमाला के अंतर्गत 31 मार्च 2026 तक 22,590 किलोमीटर सड़कें पूरी होने की सरकारी जानकारी प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। सरकार के अनुसार 50 करोड़ से अधिक लोगों को बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया गया। ऐसे ही अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान समाप्त किए गए और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया गया। सरकार इसे राष्ट्रीय एकीकरण की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है।
हवाई संपर्क का विस्तार 2014 में 74 हवाई अड्डों की तुलना में 2026 में यह संख्या 165 बताई गई है। उड़ान योजना ने छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ने में भूमिका निभाई है। इसी प्रकार से स्टार्टअप इंडिया के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014 में लगभग 350–400 स्टार्टअप से बढ़कर 2026 में संख्या 2.3 लाख से अधिक हो गई है। इनमें बड़ी संख्या टियर-2 और टियर-3 शहरों की भी है। और हां, अंतरिक्ष और तकनीकी आत्मनिर्भरताचंद्रयान-3 की सफलता, आदित्य-एल-1, गगनयान की तैयारी, सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत ने अपनी महत्वाकांक्षा बढ़ाई। सरकार के अनुसार भारत की स्पेस इकोनॉममिनी 2026 में लगभग 9 बिलियन डॉलर की हो चुकी है।जी 20 की भारत की अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रमुखता, क्वाड और विभिन्न वैश्विक मंचों पर सक्रिय कूटनीति के माध्यम से भारत की अंतर्राष्ट्रीय सक्रियता बढ़ी है। इसके अतिरिक्त भी मोदी सरकार ने विकास और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े मामलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में बेहद अहम सराहनीय कार्य किए हैं। राष्ट्र हित में मोदी ने इतने कार्य किये हैं कि इस कॉलम में सभी का जिक्र कर पाना संभव नहीं है।
प्रधानमंत्री के सम्बोधन पर विपक्षी हो-हल्ला बेवजह
Summary :
ऐतिहासिक लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे खासे भाषण के जिस प्रकार से विपक्षी व वामपंथी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें कमतर बताने का यत्न कर रहे हैं, इस से हिंदी का जुमला याद आ गया कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। कोई भी सरकार चाहे कितनी ही मजबूत क्यों न हो, भारत जैसे विशालकाय देश को कामयाबी से चलाना कोई आसान काम नहीं है। प्रधानमंत्री के भाषण की रीलें बनाई गईं, हर बात को लेकर अट्टहास किया गया आदि। लोकतंत्र में यह सब चलता है, मगर प्रधानमंत्री की गरिमा पर आंच नहीं आनी चाहिए, जैसा छात्र…



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