रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी कुछ बोलते हैं तो यह मान कर चलिए कि उसके पीछे कोई न कोई लक्ष्य होता है। पिछले सप्ताह जब सेंट पीटर्सबर्ग में उन्होंने ग्लोबल न्यूज एजेंसियों के पत्रकारों से बात की तो उनका लक्ष्य बड़ा साफ था। वे भारत के साथ रिश्तों का जिक्र करके न केवल अमेरिका बल्कि पाकिस्तान और चीन को भी संदेश दे रहे थे कि रूस इस पुराने रिश्ते की मिठास कम नहीं होने देगा। भारत के लिए यह निश्चय ही भरोसे वाली बात है। यह पहली बार नहीं है जब रूसी राष्ट्रपति ने भारत से अच्छे संबंधों की दुहाई दी है। वे हर मौके पर भारत की तारीफ करते रहे हैं और सबसे भरोसे का पार्टनर भी बताते रहे हैं।
और यह सच भी है, मगर इस बार चर्चा में उन्होंने 1947 का जिक्र किया जब सोवियत संघ ने भारत के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि तब से हम एक नए स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना में हरसंभव सहयोग करते रहे हैं। यह भारत को याद दिलाना भी हो सकता है और भरोसा दिलाना भी हो सकता है कि वो हम ही हैं जो हमेशा साथ खड़े हैं। उन्होंने यह तो नहीं कहा कि अमेरिका या पश्चिमी देशों ने भारत के साथ क्या रिश्ते रखे लेकिन यह जरूर कहा कि रूस के साथ रिश्तों की गर्माहट को कम करने के लिए भारत पर दबाव डालने की जो कोशिशें हो रही हैं उससे हमारे रिश्ते प्रभावित नहीं होने वाले हैं। हमारे रिश्तों की दिशा नहीं बदलेगी।
अब गौर कीजिए कि पुतिन ने यह सब क्यों कहा? इसके पीछे दो कारण नजर आते हैं। पहला तो यह कि इसी साल 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रही ब्रिक्स की बैठक में शामिल होने के लिए पुतिन भारत आने वाले हैं। ध्यान रखिए कि इस साल पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा और दूसरा कारण है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने ही वाला है। पुतिन को पता है कि अमेरिका यह जरूर चाहेगा कि समझौता इस तरह का हो कि उससे रूस को किसी न किसी रूप में घाटा हो और निश्चित रूप से पुतिन की चाहत होगी कि भारत हमेशा ही रूस का साथी बना रहे। वह अमेरिका के साथ रिश्ते भले ही अच्छे करे लेकिन रूस से दूर न जाए।
यही कारण है कि जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका और भारत के बीच सहयोग, रूस और भारत के बीच रिश्ते में मुश्किलों का कारण बन रहा है, तो पुतिन का जवाब कुछ ऐसा था- आपकी बात मुझे अजीब लग रही है। आप ऐसा क्यों सोचते हैं? हमें खुशी है कि भारत सभी देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है। यह एक महान देश है। 1.5 अरब लोगों का देश सबसे बड़ा लोकतंत्र है। स्वाभाविक है कि अपने हितों के अनुरूप वह उन देशों से संबंध विकसित करता है, जिन्हें वो जरूरी समझता है। इससे रूस कैसे प्रभावित हो सकता है?
पुतिन की ये साफगोई बताती है कि भारत-रूस संबंधों को वे हर हाल में अपने पाले में रखना चाहते हैं। उन्हें पता है कि भारत को दबाव में नहीं लाया जा सकता।
दोस्ती से साथ जरूर रखा जा सकता है, इसीलिए वे नरेंद्र मोदी के साथ ही भारत के लोगों की तारीफ करना नहीं भूलते। वे जानते हैं कि भारत में रूस को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से ही गहरे रिश्ते रहे हैं। मैं खुद भी कई बार रूस गया हूं और रिश्ते की इस गर्माहट को मैंने महसूस किया है। दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान का पुराना इतिहास है और पुतिन इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
हाल के वर्षों में यह सवाल भी हमेशा पूछा जाता रहा है कि रूस और चीन करीब हो चुके हैं। पाकिस्तान के रिश्ते चीन के साथ बहुत मधुर हैं तो क्या इससे भारत और रूस के रिश्ते प्रभावित होंगे? पुतिन ने इसका भी जवाब अपने तरीके से दिया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं को हम अच्छी तरह समझते हैं।
मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान ऐसा देश है जो पूरी तरह चीन के नियंत्रण में है, अभी तो पुतिन की बात गले नहीं उतरती क्योंकि पाकिस्तान पूरी तरह से अमेरिका के साथ ही चीन की गोद में बैठा हुआ नजर आ रहा है लेकिन पुतिन कह रहे हैं तो कुछ न कुछ राजनीति जरूर होगी। पुतिन एक पत्थर से कई फल तोड़ने वाले व्यक्ति हैं। मगर ये भी सच है कि रूस के लिए भारत भी बड़े काम का देश रहा है। यूक्रेन के साथ संघर्ष के दौरान रूस को जब अलग-थलग करने की कोशिशें लगातार हो रही थीं तब भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों में कोई दरार नहीं आने दी और रियायती दरों पर रूस से तेल की खरीद जारी रही।
अमेरिका तो इस बात से इतना नाराज भी हुआ था कि रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया था। बाद में इसे न केवल हटा लिया, बल्कि ईरान जंग के बाद रूसी तेल खरीद को लेकर छूट भी बढ़ाई गई। पुतिन को पता है कि भारत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है अभी रूस के साथ व्यापार करीब 67 अरब डॉलर के आसपास है जिसे पुतिन 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाह रहे हैं। रूस ने भारत को सुखोई-57 फाइटर जेट तकनीक पर साथ काम करने का प्रस्ताव भी दिया है मगर भारत ने कहा कि आप विकसित कीजिए। संभव है कि हम बाद में इसमें शामिल हों, यानी पुतिन ने भारत के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के हर रास्ते को सुगम करने की कोशिश की है। यह भारत के लिए भी निश्चय ही अच्छी बात है। हमें भी रूस के साथ दोस्ती का झूला झूलते रहना चाहिए। हम दोस्त थे, दोस्त हैं और दोस्त रहेंगे। इस अविश्वसनीय दुनिया में कोई तो भरोसे का साथी होना ही चाहिए।


Download Android App
Download iOS App




