गुरु ग्रन्थ साहिब के 328 लापता स्वरूपों पर गरमाई सिख राजनीति

Summary :

गुरु ग्रन्थ साहिब जिसे समूचा सिख पंथ जीवित गुरु के रूप में सम्मान देता है, क्योंकि सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने देहधारी गुरु की प्रथा को समाप्त करते हुए सिख पंथ को शब्द गुरु के हवाले करते हुए ग्रन्थ साहिब को गुरु का दर्जा दिया और कहा कि आज के बाद गुरु का सिख गुरु ग्रन्थ साहिब को जीवित गुरु के रूप में स्वीकार करेगा। आज तक अन्य धर्मों में जो ग्रन्थ लिखे गए उन्हें उनके धर्म गुरुओं के इस संसार से जाने के बाद उनके अनुयाइयों के द्वारा लिखा गया मगर गुरु ग्रन्थ साहिब एकमात्र ऐसा…

गुरु ग्रन्थ साहिब जिसे समूचा सिख पंथ जीवित गुरु के रूप में सम्मान देता है, क्योंकि सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने देहधारी गुरु की प्रथा को समाप्त करते हुए सिख पंथ को शब्द गुरु के हवाले करते हुए ग्रन्थ साहिब को गुरु का दर्जा दिया और कहा कि आज के बाद गुरु का सिख गुरु ग्रन्थ साहिब को जीवित गुरु के रूप में स्वीकार करेगा। आज तक अन्य धर्मों में जो ग्रन्थ लिखे गए उन्हें उनके धर्म गुरुओं के इस संसार से जाने के बाद उनके अनुयाइयों के द्वारा लिखा गया मगर गुरु ग्रन्थ साहिब एकमात्र ऐसा ग्रन्थ है जिसे गुरु साहिबान ने अपने जीवनकाल के दौरान इसकी रचना की। हर सिख को गुरु ग्रन्थ साहिब में दर्ज बाणी को पढ़कर उसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए पर अफसोस कि सिख समाज केवल इसकी पूजा करने तक सिमट कर रह गया। जिन ग्रन्थी, रागी, सेवादारों की गुरु ग्रन्थ साहिब के प्रति लोगों को जागरूक करने की जिम्मेवारी बनती है वह भी बाणी को पढ़ते तो हैं पर शायद अपने जीवन में अपनाते वह भी नहीं अन्यथा आज सिख कौम की ऐसी दुर्दशा न हो रही होती। सिखों का युवा वर्ग लोभ लालच या फैशनपरस्ती में आकर सिखी से दूर न हो रहा होता। रही-सही कसर धर्म के ठेकेदार बने बैठे राजनेताओं ने पूरी कर दी जिन्हें गुरु ग्रन्थ साहिब की निरन्तर होती बेअदबी, बड़ी गिनती में गुरु ग्रन्थ साहिब के पावन स्वरूपों के लापता होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
साल 2016 में गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों की रहस्यमयी गुमशुदगी का मामला पहली बार उजागर हुआ उस समय पंजाब में पंथक सरकार सत्ता में थी और शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी भी उनके पास होने के बावजूद केवल खानापूर्ति करते हुए एक आध मुलाजिम पर कार्रवाई करके मामले को ठण्डा कर दिया गया, जबकि किसी मुलाजिम की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि वह इतनी बड़ी गिनती में स्वरूपों को इधर-उधर कर सके। इसके पीछे निश्चित तौर पर कई बड़े चेहरे शामिल होंगे, जिन्हें बचाने की खातिर मामला दबा दिया गया होगा। अब इनसे कोई पूछे कि अगर इनका कोई पारिवारिक सदस्य लापता हो जाता तो क्या तब भी यह ऐसा ही करते या फिर इनकी नजर में गुरु ग्रन्थ साहिब मात्र एक पुस्तक की भान्ति है जिसके लापता होने से इन्हें मानो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। एक भी स्वरूप कोई लेकर जाता है तो बकायदा शिरोमणि कमेटी के लोग पहले उस जगह की जांच पड़ताल करते हैं जहां गुरु साहिब का प्रकाश किया जाना हो, बावजूद इसके इतने स्वरूप लापता कैसे हुए? जिन लोगों ने पावन स्वरूपों के लापता होने पर दु:ख प्रकट करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की उनपर गोलियां चलाने वाले अफसरों को पंथक सरकार नेे तरक्कियां दीं इससे शर्मनाक बात कौम के लिए क्या होगी?
उस समय पंजाब की कमान मरहूम प्रकाश सिंह बादल के पास थी और उनके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी आए। तीनों के शासनकाल में यह मामला केवल फाइलों में सिमटा रहा। अब जाकर भगवंत मान सरकार ने पहली बार कानूनी कार्रवाई करते हुए 16 एसजीपीसी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके बाद समूचा सिख पंथ मान सरकार के इस कदम को न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान बल्कि पंजाब की न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरी ओर शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी प्रधान इसे सिखों के धार्मिक मामलों में सरकारी दखलअंदाजी बता रहे हैं अब इनसे कोई पूछे कि 9 सालों में अगर आपने कोई योग्य कार्रवाई इस पर की होती तो सरकार को ऐसा करने की आवश्यकता ही न पड़ती।
गुरु के सिख का किरदार कैसा होना चाहिए? : गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सिख धर्म की स्थापना करते समय सिखों के लिए मर्यादा तय की गई थी, जिसमें पराई स्त्री को अगर उम्र में बड़ी हो तो मां और छोटी हो तो बहन बेटी के सम्मान देखने की बात सिखाई गई थी आज तक ऐसा होता भी आया है, मगर पिछले कुछ समय से सिखों के किरदार में गिरावट देखने को मिल रही है जो कि बेहद शर्मनाक और सिखी सिद्धांतों के विपरीत है। अमरीका के स्टाकटन गुरुद्वारा साहिब के सदस्य जसपाल सिंह के द्वारा एक नाबालिग लड़की का शरीरिक शोषण किया गया जिसके चलते उसे पुलिस द्वारा हिरासत मंे लिया गया। इसी प्रकार बीते दिनों जालंधर में एक अमृतधारी सिख ने शरीर पर कृपाण धारण करने के बावजूद 13 साल की एक मासूम बच्ची के साथ न सिर्फ जबरदस्ती की बल्कि उसे मौत के घाट उतार दिया। जिसकी वजह से समूचा सिख पंथ शर्मसार हुआ है हालांकि यह भी देखा गया कि इस घिनौनी हरकत को अन्जाम देना वाला कुछ माह पूर्व ही ईसाई से सिख बना था। बीते दिनों जब एक प्रवासी द्वारा इस तरह की घटना को अन्जाम दिया गया था तो पंजाबभर से लोगों ने सड़कों पर आकर प्रवासियों को पंजाब से बाहर करने की बात कही थी, मगर एक अमृतधारी सिख के इस कारनामे ने लोगों की आवाज बंद कर दी है।
सिख का किरदार तो ऐसा था कि पुरातन समय में मुगलों के द्वारा जब हिन्दुओं की लड़कियों को जबरन उठाकर ले जाया जाता और गजनी के बाजार में मन्डियां लगाकर बेचा जाता उस समय गुरु के सिख उन लड़कियों को छुड़वाकर पूरी हिफाजत के साथ घर तक पहुंचाते। मुगलों के साथ सिखांे ने युद्ध भले ही किए मगर उनकी बहू बेटियों पर भी कभी बुरी निगाह नहीं डाली। आज तक किसी बस में भी अगर कोई सिख चढ़ जाए तो लोग अपनी बहू बेटियों को यह सोचकर अकेला भेज देते थे कि सिख उसकी हिफाजत करेगा। इसके लिए हर माता-पिता को चाहिए कि बचपन से ही अपने बच्चों को गुरु साहिब और सिखों के गौरवमई इतिहास की जानकारी दे जिससे भूलकर भी कोई सिख ऐसी घिनौनी हरकत न करें, बल्कि अगर कहीं भी ऐसा कुछ देखने को मिले तो अपने पूर्वजों की भान्ति अपनी जान पर खेलकर बच्ची की रक्षा करें।
सिख धर्म में शहादतें खुशी का प्रतीक : सिखों का तो इतिहास ही शहादतों से भरपूर हैं। इतिहास के पन्ने खोलें तो उसमें देखने को मिल जाएगा कि साल में शायद ही कोई दिन ऐसा रहा होगा जब सिखांे ने अपनी शहादतें देकर देश, धर्म, मानवता की रक्षा न की हो। आज भी देश की सरहद पर आए दिन सिख सैनिकों की शहादतें होती ही रहती हैं, ऐसे में किसी भी तरह का भ्रम सिख समाज को नहीं डालना चाहिए जैसा कि इस बार देखने को मिल रहा है गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व जो कि पोह सुदी सातवीं को आता है और इस साल उसी दिन उनके छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी की शहादत का दिन है जिसके चलते सिख समाज काफी दुविधा में था कि साहिबजादों की शहादत और गुरु महाराज का प्रकाश पर्व दोनों को एक साथ कैसे मनाया जाए? हालांकि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार भी इस पर अपना मार्गदर्शन सिख समाज को दे चुके हैं कि समाज अपनी सुविधा अनुसार प्रकाश पर्व को मना सकता है।
तख्त पटना साहिब के कथावाचक भाई सतनाम सिंह का कहना है कि सिख मर्यादा में गुरु का सिख खुशी का मौका हो या गमी का, गुरबाणी कीर्तन श्रवण करें, अरदास करते हैं, इसलिए बिना किसी भ्रम के गुरबाणी कीर्तन गायन कर शहीदी और प्रकाश पर्व को मनाएं।

Team Desk