यदि यह कहा जाए कि दिल जीतने की कलाकारी में भारतीय प्रधानमंत्री से बड़ा कलाकार कोई दूसरा नेता विश्व में नहीं। सड़क पर झालमुड़ी खाई और बच्चों के साथ, बंगाल के लोकप्रिय खेल फुटबॉल के कोच की भांति फुटबॉल खेल कर ममता दीदी का संपूर्ण खेला कर दिया। अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय ! दूसरी बात यह कि भारत के चुनाव इतिहास का भाजपा की बंगाल वाली जीत एक करिश्मा, एक अजूबा है। जहां अपने दौरों में मोदी और अमित शाह ने “मेक बंगाल ग्रेट अगेन” की भाषा से एक आम बंगाली के मन, मस्तिष्क और आत्मा को जीत लिया। इस बार बंगाल में ही नहीं, बल्कि अन्य प्रांतों में भी भाजपा ने, केरल को छोड़ सबसे बढ़िया किया है। तमिलनाडु में भी स्टालिन का बोरिया-बिस्तर लपेटने में भाजपा का बड़ा रोल रहा। इस चुनाव को जीतने में जो नरेंद्र मोदी, अमित शाह जुगलबंदी रही, वह अटल बिहारी वाजपेयी के इसी कथन को जमीन पर लाया कि सूरज उगेगा, कमल खिलेगा। वास्तव में स्वयं भाजपा को ही नहीं पता कि कितना बड़ा किला बंगाल का उसने अपनी झोली में डाल लिया है। हां, जीतने के बाद शुभेंदु सरकार ने जिस प्रकार से मुसलमानों को दोष दिया कि उन्होंने दोनों हाथों से भर-भर कर ममता को वोट दिए, ठीक नहीं था, क्योंिक जीतने के बाद सभी को ग्रेसफुल होना चाहिए। इस प्रकार के बयानों से दूरियां और वैमनस्य बढ़ते हैं।
बंगाल में मोदी-शाह की कार्पेट बॉम्बिंग ने प्रांत के विकास के लिए ममता के ड्रोन फेल कर दिए। जिस प्रकार से अमित शाह ने अपनी मेहनत और कार्य प्रणाली द्वारा एक के बाद दूसरा चुनाव जीता है उससे उन्होंने यह प्रमाणित कर दिया है कि अपने परम मित्र मोदी के वे सब से दक्ष उत्तराधिकारी हैं। हां, मोदी का यह कमाल अवश्य है कि उन्होंने पिछले बारह वर्षों में भारत के डेढ़ करोड़ निवासियों को नरेंद्र मोदी में परिवर्तित कर दिया है। इन चुनावों का सबसे अच्छा पहलू यह रहा कि कहीं भी गोला-बारूद नहीं चला, कोई मारा नहीं गया जैसे बंगाल में भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं की जान विशेष रूप से बंगाल और केरल में ली जाती रही हैं। बंगाल में ममता का खौफ था कि यदि उन्हें पता चल गया कि वोट तृणमूल को नहीं दिया गया तो उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कितने भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस विजय के लिए अपनी जानों की कुर्बानी दी है। जहां भाजपा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को इस जीत का श्रेय दे रही है, उसी प्रकार से हर बलिदानी कार्यकर्ता के परिवार को रोज़गार और मदद से मालामाल कर देना चाहिए और उनकी प्रतिमाएं स्थापित होनी चाहिए।
ममता का जबानी जमा खर्च, ‘मां, माटी, मानुष’ सुनने में तो बहुत अच्छा था, मगर फेल इसलिए हुआ कि उसको उन्होंने जमीन पर नहीं उतारा और न तो लोगों को रोज़गार मिला और न ही सिक्योरिटी। वास्तव में ममता दीदी ने तीसरी पारी में जनता को “टेकन फॉर ग्रांटेड” के रवैये से काफ़ी दुःखी किया। फिर जिस प्रकार धमकी भरी और घमंड से चूर भाषा प्रधानमंत्री से लेकर अन्य नेताओं के प्रति ममता दीदी बोलती चली आ रही हैं, आम लोगों में इसका विपरीत असर पड़ा।
हैरानी की बात है कि जिन मुसलमानों ने दोनों हाथ भर कर तृणमूल को वोट दिए, ममता ने सिवाय नारेबाज़ी के ठेंगे के उन्हें कुछ नहीं दिया। उनकी बस्तियां गंदगी और बड़बोले कुछ नहीं। उनके मकान, मदरसे आदि दयनीय स्थिति में हैं। बजाय स्कूलों क्रीड़ांगनों, उद्यानों आदि के उनकी बस्तियों में पुलिस स्टेशन अधिक हैं। भले ही भाजपा ने पूर्व में चुनाव जीते हों, मगर जो एेतिहासिक विजय बंगाल में भाजपा को मिली है, उसे हम बंपर जीत का दर्जा नहीं तो क्या कहें। ममता राज की काफ़ी त्रुटियां सामने आई हैं। संदेशखाली, बसीरहाट और आर जी कार मेडिकल कॉलेज जैसी हज़ारों बातें ऐसी हुईं कि जो जनता में चर्चा का विषय बनीं। जिस प्रकार से भाजपा की कैंडिडेट रत्ना देव नाथ के चेहरे पर तृणमूल के गुंडों ने थूका, वह वीभत्सपूर्ण कृत्य भी दुनिया ने देखा। यह भी देखा गया कि तृणमूल के बदमाशों ने भाजपा के कार्यकर्ताओं से कहा कि जिंदा रहना चाहते हो तो अपनी औरतों को तृणमूल के नेताओं के घर भेजो। जिस प्रकार से ममता दीदी ने बंगाल में भय का भयानक वातावरण पैदा कर दिया था। भले ही ममता ने पूर्व में चुनाव जीते, मगर लोगों को प्रायः विस्मय होता था किस प्रकार से आग और ज़हर उगलने वाली चंडी देवी जैसी ममता दीदी कैसे जीत जाती हैं।
कुछ भी हो, सलाम है, भाजपा के धुरंधर अंदाज़ से इलेक्शन लड़ने की कोशिशों को। कोई क्लोन भी नहीं कर सकता था कि बंगाल भाजपा की झोली में गिर जाएगा। अब जबकि भाजपा जीत चुकी है, उसे इस बात पर ध्यान देकर काम करना होगा कि आजादी के बाद से बंगाल को इंसाफ नहीं मिला है और इसकी दशा जर्जर है। पहले तो इस डबल इंजन सरकार को 75 साल के खड्डों को भरना होगा और साथ ही साथ मुस्लिमों का दिल भी जीतना होगा, जिनके क्षेत्रों से इस बार 45 प्रतिशत सीटें भाजपा ने जीती हैं जिससे प्रतीत होता है कि उन्होंने भी भाजपा को वोट दिए हैं।
मोदी की झालमुड़ी का कमाल, जीत लिया बंगाल !
Summary :
यदि यह कहा जाए कि दिल जीतने की कलाकारी में भारतीय प्रधानमंत्री से बड़ा कलाकार कोई दूसरा नेता विश्व में नहीं। सड़क पर झालमुड़ी खाई और बच्चों के साथ, बंगाल के लोकप्रिय खेल फुटबॉल के कोच की भांति फुटबॉल खेल कर ममता दीदी का संपूर्ण खेला कर दिया। अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय ! दूसरी बात यह कि भारत के चुनाव इतिहास का भाजपा की बंगाल वाली जीत एक करिश्मा, एक अजूबा है। जहां अपने दौरों में मोदी और अमित शाह ने “मेक बंगाल ग्रेट अगेन” की भाषा से एक आम बंगाली के मन, मस्तिष्क और आत्मा को जीत लिया। इस…


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