भारत के करोड़ों हिन्दुओं के अराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम रोम-रोम में बसे हैं। देशवासियों की श्रीराम में अटूट आस्था है। श्रीराम का स्मरण करने मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है और मानव जन-जन के कल्याण के लिए प्रेरित होता है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बाद देशवासियों की आस्था को काफी आघात लगा। पूरे मामले ने राजनीतिक रंगत धारण कर ली है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पहला पूर्णकालिक सीईओ मिल गया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल और पाकिस्तान के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने वाले भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा को सीईओ नियुक्त किया गया।
उनके अलावा ट्रस्ट में पहली महिला सदस्य सहित तीन नए ट्रस्टियों को शामिल किया गया है। पूर्व प्रिंसीपल डॉक्टर निर्मला यादव, अधिवक्ता मदन मोहन पांडे और व्यवसायी तथा सामाजिक कार्यकर्ता महेश भागचंदका की नियुक्ति न केवल व्यापक सामाजिक समावेश है बल्कि चंदा चोरी घोटाले के बाद ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और लोगों के विश्वास को बढ़ाने के प्रयास में विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव प्राप्त लोगों को शामिल करने के लिए भी उल्लेखनीय है। यह तीनों उन पदों को भरेंगे जो पिछले साल बिमलेन्द्र मोहन मिश्रा की मृत्यु और चढ़ावा चोरी विवाद के दृष्टिगत पूर्व महासचिव चम्पत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद खाली हो गए थे।
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के कुछ कर्मचारियों द्वारा चढ़ावे की चोरी से जुड़े विवाद ने देश के हर आस्थावान नागरिक को झकझोर कर रख दिया है। मंदिर पवित्र स्थान होते हैं और चढ़ावा केवल दान नहीं होता बल्कि देवता और भक्तों के बीच एक व्यक्तिगत बंधन होता है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए 500 वर्षों तक लम्बा संघर्ष किया गया। श्रीराम मंदिर के प्रति गहन भावनात्मक लगाव जनवरी 2024 में हुए अभिषेक समारोह में भव्यता से प्रकट हुआ था, तब समूचा राष्ट्र राममयी हो गया था।
प्रशासनिक फेरबदल के बाद चढ़ावा चोरी मामले में भक्तों का डांवाडोल हुआ भरोसा फिर से बहाल करना नए सीईओ के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। देशभर के कई धर्म स्थानों में चढ़ावा चोरी की खबरें आने के बाद जन-जन का विश्वास हासिल करना नए पदाधिकारियों के लिए सहज नहीं होगा। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट देश का ऐसा सातवां बड़ा धार्मिक संस्थान बन गया है जहां धार्मिक नेतृत्व और रोजमर्रा को प्रशासन अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ संचालित हो रहे हैं।
तिरुमाला तिरुपति देव स्थानम में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में सीईओ, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सीईओ और पुरी जगन्नाथ मंदिर में मुख्य प्रशासक ही जिम्मेदारी सम्भालते हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ जितेन्द्र मिश्रा को ट्रस्ट का पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी माना जा सकता है लेकिन ट्रस्ट का स्थान नहीं लेगा। महामंत्री की ओर से तय नीतियों के अनुसार सीईओ काम करेगा। इसलिए व्यवस्था का मॉडल ट्रस्ट नीति बनाएगा और सीईओ उसे जमीन पर लागू करेगा। ट्रस्ट के नए महामंत्री बने गोविन्द देव गिरि का कहना है कि नकद चढ़ावे की गणना तकनीक से होगी और इस प्रक्रिया में मानवीय हस्ताक्षेप को कम से कम किया जाएगा।
ट्रस्ट के पास 31 मार्च, 2026 तक 1882 करोड़ राशि उपलब्ध है। दान, चढ़ावे, खर्च, खरीद और परियोजनाओं में तय प्रक्रियाओं का पालन तथा पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों में काम का बंटवारा नए सिरे से होगा। उनकी कार्यप्रणाली, ड्यूटी व्यवस्था, मानव संसाधन और विभागीय समन्वय को व्यवस्थित किया जाएगा। संत समाज परियोजनाओं और कार्यप्रणाली पर निगरानी रखेगा। ट्रस्ट के दोनों महत्वपूर्ण पद अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और महामंत्री स्वामी गोविन्द देव गिरि के पास हैं।
ट्रस्ट में कई धार्मिक पीठों के जगत गुरुओं की मौजूदगी भी है। ट्रस्ट द्वारा मंदिर के खर्चों और भक्तों द्वारा दी गई भेंट का पूरा ब्यौरा रखने और एक स्वतंत्र चार्टर अकाउंटैंट फर्म द्वारा प्रति वर्ष इसका भौतिक सत्यापन कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। वैसे तो देश के धर्म स्थलों और कई शक्तिपीठों से चढ़ावा चोरी के मामले सामने आने के बाद कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में हेराफेरी करने वाले लोगों को जेल भी भेजा जा चुका है।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूर्व एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा सीईओ के रूप में प्रशासनिक चुनौतियों को किस तरह से पार पाते हैं।
जितेन्द्र मिश्रा ने भरोसा दिया है कि मंदिर का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहेगा। उनका उद्देश्य मंदिर के लिए विशेष रूप से प्रबंधन और वित्तीय मामलों से सम्बन्धित क्षेत्रों में एक अधिक सुरक्षित प्रशासनिक प्रणाली का निर्माण करना है। उनकी नियुक्ति के साथ ही व्यवस्थाओं में बदलाव का दौर शुरू होने की शुरूआत हो रही है। जितेन्द्र मिश्रा की पृष्ठभूमि डिफैंस की रही है। उम्मीद है कि वे राजनीतिक पहलुओं में शामिल नहीं होंगे और अपना पूरा ध्यान जिम्मेदारियों पर केन्द्रित करेंगे। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। दरअसल राम मंदिर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और भावनात्मक रूप से एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
इस मुद्दे पर सियासत के तीर बड़े तीखे होकर चलेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद व्यवस्थाएं संस्थागत रूप से विकसित की गईं लेकिन कई स्तरों पर आपसी तालमेल और अनुशासन की कमी सामने आती रही है। कर्मचारियों को श्रद्धालुओं से बेहतर व्यवहार का प्रशिक्षण नहीं दिया जा सका। उम्मीद की जाती है कि नए सीईओ कर्मचारियों को अनुशासन प्रिय बनाने के लिए कदम उठाएंगे।
अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 की घटना के बाद से राम मंदिर आतंकी संगठनों के निशाने पर रहा है। पांच जुलाई 2005 को यहां आतंकी हमला भी हो चुका है। बढ़ते खतरे को देखते हुए एसएसएफ की तैनाती की गई है और एनएसजी की तैनाती भी प्रस्तावित है। ऐसे में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के सीईओ बनने से उनके सेवाकाल का अनुभव मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
स्थायी सुरक्षा समिति की ओर से तय मानकों और सीईओ मिश्रा के अनुभव को आधार बनाकर नए सुरक्षा मानक तय किए जाने और उनके प्रभावी अमल की संभावना है। नई टीम को राम भक्तों का भरोसा जीतना होगा। उनके एक-एक पैसे का हिसाब रखना होगा। जन-जन को इस बात का भरोसा होगा कि उनके दान का इस्तेमाल जन-जन के कल्याण के लिए होगा, तभी ट्रस्ट की विश्वसनीयता कायम होगी।


Download Android App
Download iOS App




