रिश्तों का कत्ल क्यों

Summary :

देशभर में इन दिनों भयावह हत्याकांड को लेकर सनसनी मची हुई है। आज के समय में हर कोई भाग-दौड़ में लगा हुआ है। इसी भाग-दौड़ की वजह से लोगों के पास अब समय और धैर्य दोनों की ही कमी होने लगी है। आज के दौर में लोग अपने जीवन में सब बहुत जल्दी हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं। अपनी इसी कोशिश के बदौलत लोग न सिर्फ जल्दी खुशी हासिल कर लेते हैं, बल्कि रिश्ते में काफी जल्दी सामंजस्य भी बना लेते हैं लेकिन ऐसे रिश्तों में अक्सर धैर्य की कमी रह जाती है। ऐसे रिश्ते में रहने…

देशभर में इन दिनों भयावह हत्याकांड को लेकर सनसनी मची हुई है। आज के समय में हर कोई भाग-दौड़ में लगा हुआ है। इसी भाग-दौड़ की वजह से लोगों के पास अब समय और धैर्य दोनों की ही कमी होने लगी है। आज के दौर में लोग अपने जीवन में सब बहुत जल्दी हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं। अपनी इसी कोशिश के बदौलत लोग न सिर्फ जल्दी खुशी हासिल कर लेते हैं, बल्कि रिश्ते में काफी जल्दी सामंजस्य भी बना लेते हैं लेकिन ऐसे रिश्तों में अक्सर धैर्य की कमी रह जाती है। ऐसे रिश्ते में रहने वाले लोग न कुछ सीखना चाहते हैं, न एडजस्ट करना चाहते हैं और न ही दूसरे की बात को समझना चाहते हैं। ऐसे हालातों में रिश्तों में दरार आनी शुरू हो जाती है, जो आगे चलकर तनाव और गुस्से का रूप लेती है। साथी, प्रेमी या फिर पति की हत्‍या कर उसके शव को टुकड़ों में काटना… ये कैसी सनक है। प्‍यार कभी हिंसा के रास्‍ते पर लेकर नहीं जाता है। क्‍या ऐसी दिल दहला देने वाली हत्‍याएं ‘रिश्‍तों की मौत’ नहीं हैं?
एक पति की हत्‍या उसकी पत्‍नी ने कर दी। पति की हत्‍या करने के बाद अपने ब्वायफ्रेंड के साथ मिलकर शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके चार टुकड़े कर दिये। ‘रिश्‍तों की मौत’ का ये अकेला मामला नहीं है, इससे पहले श्रद्धा वालकर समेत कई ऐसी खौफनाक वारदात सामने आ चुकी हैं। आखिर कोई इस हद तक कैसे गुजर जाता है कि अपने साथी की बेरहमी से हत्‍या करने से पहले एक बार भी नहीं सोचता? यूपी के फिरोजाबाद के शिकोहाबाद के चर्चित आरव हत्याकांड में रविवार को जिला अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर मासूम के शव का पोस्टमार्टम हुआ। डॉक्टरों के द्वारा की गई इस जांच में हैवानियत की जो कड़वी सच्चाई सामने आई है, उसने डॉक्टरों को भी झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की बर्बरता के कारण डेढ़ साल के आरव के सिर और छाती की सभी हड्डियां पूरी तरह चकनाचूर हो चुकी थीं। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने चोटों की तीव्रता के आधार पर अनुमान लगाया है कि जब आरोपी विराज ने मासूम को पहली बार हवा में उछालकर पक्की सड़क पर दे मारा, तभी आरव के स्कैल्प (खोपड़ी) के सभी जोड़ खुल गए थे और वह तुरंत अचेत (बेहोश) हो गया था। विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने रिश्ते की भाभी रती से शादी करने की जिद पूरी न होने पर उसके डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को सड़क पर बेरहमी से आठ बार पटक-पटककर मार डाला था। यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। मूल रूप से अरांव निवासी रती देवी की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी।
पति से अनबन के कारण वह पांच महीने से मायके में रह रही थी। इसी बीच सुमित के फुफेरे भाई विराज उर्फ जितेंद्र पाठक निवासी शेखूपुर, बदायूं ने रती के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रती ने ठुकरा दिया था। एक आदमी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपने दो मासूम बेटांे और पत्नी को काट डाला। अपने ही बच्चों का गले रेतते हुए इस ज़ालिम बाप को ज़रा भी तरस नहीं आया।
सच यह है कि आज हम इतने स्वार्थी और एकांतवादी होते जा रहे हैं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी मनमानी करने के लिये हम रिश्तों-नातों को कच्चे धागों की तरह तोड़ने में एक पल भी नहीं लगाते। अगर थोड़ा झगड़ा और रूठना-मनाना कर ये सम्बंध फिर से प्यार माेहब्बत की डोर में बंध जायें तो फिर भी आपसी तालमेल और साझा जीवन का एक रास्ता निकल सकता था लेकिन आज तो हालत यह हो गयी है कि साझा परिवार टूटते जा रहे हैं। कुछ लोग तो शादी से पहले ही लड़के के परिवार के सामने यह शर्त रख देते हैं कि उनकी लड़की शादी के बाद अलग रहना पसंद करेगी। यह अजीब बात है कि लगभग सभी मां-बाप अपनी लड़की को यह समझाकर ससुराल भेजते हैं कि शादी के बाद अपने पति को अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश करना और मौका देखते ही अलग हो जाना जिससे सास-ससुर और ननद, भावज, जेठ-जेठानी और देवर-देवरानी की सेवा और ज़िम्मेदारी से बचा जा सके जबकि अपने घर आने वाली लड़के की बहू से सौ प्रतिशत यह आशा करते हैं कि वह अपने मायके को भूलकर लड़के के पूरे परिवार के हिसाब से चले। दर्जन दो दर्जन से चार पांच लोगों की छोटी यूनिट में आध्ुनिक प्रगतिशील माता-पिता की बोल्ड सोच के बच्चे चाहते हैं कि उनका अपना निजी कमरा, फोन, टीवी और अलग कंप्यूटर हो। कमरे में अटैच टॉयलेट बाथरूम हो। आज के समय में फिल्मों, वेब सीरीज और यहां तक कि गेम्स में भी हिंसात्मक और अपराध आधारित कंटेंट दिखाने का ट्रेंड सा बन गया है। फिल्मों और सीरीज में लगातार दिखाए जाने वाले ऐसे शोज ने लोगों के दिमाग में एक गहरी छाप छोड़नी शुरू कर दी है। यह फिल्में और सीरीज न सिर्फ लोगों को अपराध दिखाते हैं, बल्कि अपराधियों को एक हीरो की तरह पेश कर उनका गुणगान भी करती हैं। जिसमें न सिर्फ अपराध दिखाया गया है, बल्कि इसे अंजाम देने के तरीकों को भी करीब से बताया गया है। अगर लोग लगातार इस तरह के शोज देखते रहेंगे तो उनके मन में यह धारणा बन जाएगी कि रील लाइफ की ही तरह रियल लाइफ में भी हिंसा का सहारा लेना बिल्कुल सही है। रिश्ते में गुस्से और हिंसा की सबसे मुख्य वजह होती है उम्मीदों का पूरा न होना। अक्सर किसी रिश्ते में लोग एक-दूसरे से कई तरह की इच्छाएं और उम्मीदें रखते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है, जब आप या आपके पार्टनर इन उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाते हैं। ऐसे में रिश्ते में मौजूद यह अपूर्ण उम्मीदें अक्सर गुस्से और चिड़चिड़ेपन में बदल जाती हैं। ऐसे में रिश्ते में रहने की वजह से कई बार लोग मेंटल स्ट्रेस से भी जूझने लगते हैं। लगातार टूटती उम्मीदों की वजह से यह गुस्सा इस हद तक बढ़ जाता है कि कई बार हिंसा का रूप ले लेता और बाद में यह गुस्सा किसी बड़े अपराध की वजह बन जाता है। कहने का मतलब यह है कि जब हम पूंजीवादी व्यवस्था में जी रहे हैं तो उसकी बुराइयां और कमियां भी हमको झेलनी होंगी। यह नहीं हो सकता कि हम गुड़ खायें और गुलगुलों से परहेज़ करें। शिक्षा के साथ-साथ जब तक हम सही शिक्षा, समाज व नैतिकता के बारे में नहीं सोचेंगे तब तक खून के रिश्तों का खून ऐसे ही नहीं बहता रहेगा बल्कि यह वारदातें और ख़तरनाक हादसे बढ़ते ही जायेंगे।

Aakash Chopra