टीवी के सबसे फेमस सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में इन दिनों जबरदस्त ड्रामा देखने को मिल रहा है। शांति निकेतन में सगाई का माहौल था, ढोल-नगाड़े बज रहे थे और सब बेहद खुश थे। लेकिन किसे पता था कि इस खुशी के पीछे तुलसी एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेलने वाली हैं, जिससे तृप्ति की चालें धरी की धरी रह जाएंगी।
सगाई की रस्म शुरू ही होने वाली थी कि अचानक दरवाजे पर किसी के कदम पड़े और पूरा का पूरा माहौल ही बदल गया।
शांति निकेतन में जमा खुशियों का मेला, पर तुलसी के मन में छिपा था बड़ा डर

एपिसोड की शुरुआत बेहद भावुक माहौल से होती है। समैरा और सिड की सगाई की तैयारियां ज़ोरों पर थीं। वैष्णवी और तुलसी घर की सजावट और बाकी चीज़ों को संभालते हुए काफी इमोशनल नज़र आईं। तुलसी ने दिल की बात बताते हुए कहा कि एक मां के नाते उन्हें सबको एक साथ हंसते-खेलते देखकर बहुत तसल्ली मिल रही है। हालांकि, तुलसी के मन में एक गहरा डर भी था। वो मन ही मन सोच रही थीं कि शांति निकेतन की यह खुशी आखिरकार कितने दिनों तक टिक पाएगी, क्योंकि तृप्ति का अगला कदम क्या होगा, यह कोई नहीं जानता था।
तृप्ति का ताना और तुलसी का करारा जवाब

इसके बाद एंट्री होती है तृप्ति और सुभाष की। वे सिड और अपने परिवार के साथ शांतिनिकेतन पहुंचते हैं। विरानी परिवार बड़े दिल से सबका स्वागत करता है। लेकिन तृप्ति अपनी हरकतों से बाज कहां आने वाली थी, उसने तुलसी के पास जाकर ताना मारा कि अब तो इतिहास खुद को दोहरा रहा है और वो फिर से शांति निकेतन से जुड़ने जा रही है। तृप्ति ने खुली चुनौती दी कि जल्द ही उसे इस घर में आने से कोई नहीं रोक पाएगा। मगर तुलसी ने भी साफ कह दिया कि तृप्ति सिर्फ अपनी बहू लेने आई है, इसलिए इस घर के सपने देखना बंद कर दे।
सगाई के बीच ‘दीदी भाई’ का धमाका और तुलसी की सीक्रेट चाल

जैसे ही सिड और समैरा एक-दूसरे को अंगूठी पहनाने वाले थे, तभी दरवाजे पर सूटकेस लिए एक महिला की एंट्री हुई। उन्होंने जोर से चिल्लाकर कहा- “रुको,” यह महिला कोई और नहीं बल्कि सिड की कड़क स्वभाव वाली बुआ यानी ‘दीदी भाई’ थीं। उन्हें देखते ही तृप्ति के हाथ से फलों की टोकरी छूट गई। दीदी भाई ने कोलकाता से आकर सबको चौंका दिया।
असल में, यह सब तुलसी का ही प्लान था। जब तुलसी को समैरा से पता चला कि सिड की एक बुआ कोलकाता में रहती हैं जिनकी तृप्ति से बिल्कुल नहीं बनती, तो तुलसी ने तुरंत उन्हें ढूंढकर सगाई का न्योता दे दिया। दीदी भाई के आने से तृप्ति का प्लान पूरी तरह फ्लॉप हो गया। इसके बाद जब रस्मों को लेकर बंगाली और गुजराती परंपरा की बहस छिड़ी, तो तुलसी ने बड़ी समझदारी से दोनों परिवारों की बात मानकर सगाई को पूरा करवाया।
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