ओटीटी पर हर हफ्ते कई नई रोमांटिक सीरीज रिलीज होती हैं, लेकिन नेटफ्लिक्स की ‘मुसाफिर कैफे’ कुछ अलग दिखाई दे रही है। यह सिर्फ प्यार की कहानी नहीं दिखाती, बल्कि रिश्तों, सपनों और जिंदगी के फैसलों को भी खूबसूरती से पेश करती है। ये सीरीज किसी एक किरदार को सही या गलत नहीं ठहराती, बल्कि हर किसी का नजरिया समझाने की कोशिश करती है।
- Web Series Review: मुसाफिर कैफे
- कलाकार: विक्रांत मैसी , वेदिका पिंटो , महिमा मकवाना , आदिल हुसैन , राजीव सिद्धार्थ , अनुभा फतेहपुरिया , सादिया सिद्दीकी और लवलीन मिश्रा
- लेखक: शारण्या राजगोपाल (दिव्य प्रकाश दुबे के नोवल मुसाफिर कैफे के किरदारों पर आधारित)
- निर्देशक: रुचिर अरुण
- निर्माता: विजय सुब्रमण्यम, अनुज गोसालिया, विक्रांत मैसी
- ओटीटी प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स
- रिलीज: 24 जुलाई 2026
- IMBD रेटिंग: 7.9/10
‘Musafir Cafe’ Review: कहानी

सीरीज की कहानी चंदर (विक्रांत मैसी), सुधा (वेदिका पिंटो) और प्रीति (महिमा मकवाना) के आसपास घूमती है। कहानी दो अलग-अलग समय में दिखाई गई है।
पहली कहानी चंदर और सुधा की है। दोनों की मुलाकात अरेंज मैरिज के जरिए होती है, चंदर अमेरिका से लौटे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन उनका सपना पहाड़ों में अपना छोटा-सा कैफे खोलने का है। दूसरी ओर, सुधा एक वकील है, जो अपने करियर में आगे बढ़ना चाहती है। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन उनके सपने और सोच अलग होने की वजह से रिश्ते में दूरियां आ जाती हैं।
दूसरी कहानी अब चल रहे समय की है, लॉकडाउन के दौरान चंदर की मुलाकात प्रीति से होती है। प्रीति घूमने-फिरने की शौकीन है और ट्रैवल ब्लॉग लिखती है। वो चंदर के कैफे के सपने को पूरा करने में उसका साथ देती है। दोनों मिलकर मसूरी में ‘मुसाफिर कैफे’ शुरू करते हैं। पूरी सीरीज में यह जानने की एक्साइटमेंट बनी रहती है कि आखिर चंदर और सुधा का रिश्ता क्यों टूट गया।
एक्टिंग

विक्रांत मैसी ने चंदर के किरदार में शानदार काम किया है। उनकी एक्टिंग बहुत ही नेचुरल लगती है और फैंस आसानी से उनके किरदार से जुड़ पाते हैं। महिमा मकवाना का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन उन्होंने अपने रोल को अच्छे से निभाया है। उनकी और विक्रांत की जोड़ी भी काफी अच्छी लगती है।
वहीं वेदिका पिंटो ने मेहनत जरूर की है, लेकिन कुछ जगह उनकी एक्टिंग थोड़ी बनावटी महसूस होती है। विक्रांत और वेदिका की केमिस्ट्री भी उतनी मजबूत नहीं दिखती, जितनी कहानी की जरूरत थी। सपोर्टिंग कलाकार आदिल हुसैन, अनुभा फतेहपुरिया, सादिया सिद्दीकी और लवलीन मिश्रा ने भी अपने छोटे-छोटे किरदारों में अच्छा काम किया है।
निर्देशन

निर्देशक रुचिर अरुण ने कहानी को सादगी के साथ पेश किया है। मसूरी और भोपाल की खूबसूरत लोकेशन सीरीज को और बेहतर बनाती हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक भी इमोशनल सीन को असरदार बनाता है। हालांकि, शुरुआत के कुछ एपिसोड और बीच के कुछ हिस्से थोड़े धीमे लगते हैं। अगर एडिटिंग थोड़ी और बेहतर होती, तो सीरीज और ज्यादा अच्छी लग सकती थी।
देखें या नहीं?

अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं, जो रिश्तों और इमोशन्स को धीरे-धीरे समझाती हैं, तो ‘मुसाफिर कैफे’ आपके लिए अच्छी पसंद हो सकती है। इसमें तेज़ ट्विस्ट या ज्यादा सस्पेंस नहीं है, लेकिन इसकी कहानी दिल को छूती है। अगर आप वीकेंड पर आराम से बैठकर एक सुकून भरी और इमोशनल सीरीज देखना चाहते हैं, तो ‘मुसाफिर कैफे’ को जरूर देख सकते हैं।
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