Mysterious Temple Customs in India: भारत अपनी पुरानी संस्कृति और खूबसूरत मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां के हर राज्य और गांव में ऐसे मंदिर हैं जो अपने रहस्यों और पुरानी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। आमतौर पर हम मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करते हैं और पुजारी जी से मिलने वाला प्रसाद खुशी-खुशी घर लाते हैं और परिजनों में बांटते हैं। शास्त्रों के अनुसार भी मंदिर का प्रसाद खाना बहुत शुभ होता है क्योंकि इसे भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। लेकिन भारत में कुछ मंदिर…
Mysterious Temple Customs in India (AI Generated)
Mysterious Temple Customs in India: भारत अपनी पुरानी संस्कृति और खूबसूरत मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां के हर राज्य और गांव में ऐसे मंदिर हैं जो अपने रहस्यों और पुरानी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। आमतौर पर हम मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करते हैं और पुजारी जी से मिलने वाला प्रसाद खुशी-खुशी घर लाते हैं और परिजनों में बांटते हैं।
शास्त्रों के अनुसार भी मंदिर का प्रसाद खाना बहुत शुभ होता है क्योंकि इसे भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। लेकिन भारत में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां का प्रसाद खाना या घर ले जाना अशुभ माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों है और वो कौन से मंदिर हैं।
Mysterious Temple Customs in India: भारत के रहस्यमयी मंदिर
1. कामाख्या देवी मंदिर (असम)
Mysterious Temple Customs in India (Source: Social Media)
गुवाहाटी का यह मंदिर भी एक शक्तिपीठ है। यहां हर महीने तीन दिनों के लिए मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि उस समय देवी मासिक धर्म के दौर में होती हैं। इन दिनों न तो कोई मंदिर में जा सकता है और न ही वहां से प्रसाद ले सकता है, क्योंकि यह देवी के आराम का समय होता है।
2. नैना देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
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हिमाचल प्रदेश का यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां नियम है कि मां को चढ़ाया गया प्रसाद केवल मंदिर परिसर के अंदर ही खाना चाहिए। अगर कोई इसे घर ले जाता है, तो इसे अशुभ माना जाता है।
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यह मंदिर हनुमान जी के बाल स्वरूप बालाजी को समर्पित है और यहां लोग बुरी शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। यहां भगवान को बूंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं, लेकिन इस प्रसाद को खाना या घर ले जाना मना होता है। माना जाता है कि अगर कोई यहां का प्रसाद घर ले जाता है, तो उसके साथ नकारात्मक शक्तियां भी चली जाती हैं।
4. काल भैरव मंदिर (उज्जैन)
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उज्जैन के इस मंदिर में भगवान काल भैरव को प्रसाद के रूप में मदिरा का भोग लगाया जाता है। यहां की मान्यता है कि यह प्रसाद सिर्फ भगवान के लिए है। भक्त इसे अपने साथ घर नहीं ले जाते। कहा जाता है कि जो इस नियम को तोड़ता है, उसे जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
6. कोटिलिंगेश्वर मंदिर (कर्नाटक)
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कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित इस मंदिर में एक करोड़ शिवलिंग हैं। यहां का प्रसाद चंडेश्वर देवता को चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंडेश्वर देवता को चढ़ाया गया प्रसाद खाना या घर ले जाना अच्छा नहीं माना जाता, इसलिए भक्त इसे केवल दूर से स्वीकार करते हैं।
खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।