Baglamukhi Jayanti 2026: शत्रु बाधा से मुक्ति दिलाती हैं मां बगलामुखी, आज इस चालीसा और आरती से करें माता को प्रसन्न

Summary :

Baglamukhi Mata Chalisa and Aarti Lyrics Hindi: हिंदू धर्म में दस महाविद्या की अराधना की जाती है, जिनमें मां बगलामुखी आठवीं देवी हैं। माता बगलामुखी अपनी स्वर्ण जैसी आभा के कारण पीताम्बरा भी कहलाती हैं। माना जाता है कि इनकी पूजा करने से विरोधियों को पराजित करने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष बगलामुखी जयंती का पर्व आज यानी 24 अप्रैल को मनाया जा रहा है।आज के दिन माता की विशेष आराधना और चालीसा का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, क्योंकि…

Baglamukhi Mata Chalisa and Aarti Lyrics Hindi: हिंदू धर्म में दस महाविद्या की अराधना की जाती है, जिनमें मां बगलामुखी आठवीं देवी हैं। माता बगलामुखी अपनी स्वर्ण जैसी आभा के कारण पीताम्बरा भी कहलाती हैं। माना जाता है कि इनकी पूजा करने से विरोधियों को पराजित करने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है।
इस वर्ष बगलामुखी जयंती का पर्व आज यानी 24 अप्रैल को मनाया जा रहा है।आज के दिन माता की विशेष आराधना और चालीसा का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इससे न केवल घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर सकारात्मकता का संचार होता है, बल्कि यह मानसिक तनाव को दूर होता है और आंतरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है। इस दिन माता की पूजा के बाद आरती का गायन भी जरूरी माना जाता है। यहां पर मां बगलामुखी चालीसा और आरती की लिरिक्स दी गई हैं।

Baglamukhi Mata Chalisa and Aarti Lyrics Hindi

मां बगलामुखी चालीसा

॥ दोहा ॥
नमो महाविद्या वरदा, बगलामुखी दयाल।
स्तम्भन क्षण में करे, सुमिरत अरिकुल काल॥॥ चौपाई ॥
नमो नमो पीताम्बरा भवानी।
बगलामुखी नमो कल्याणी॥भक्तवत्सला शत्रु नाशिनी।
नमो महाविद्या वरदानी॥अमृत सागर बीच तुम्हारा।
रत्न जड़ित मणि मंडित प्यारा॥

स्वर्ण सिंहासन पर आसीना।
पीताम्बर अति दिव्य नवीना॥

स्वर्णभूषण सुंदर धारे।
सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे॥

तीन नेत्र, दो भुजा मृणाला।
धारे मुद्गर पाश कराला॥

भैरव करें सदा सेवकाई।
सिद्ध काम सब विघ्न नसाई॥

तुम हताश का निपट सहारा।
करें अकिंचन अरिकुल धारा॥

तुम काली, तारा, भुवनेशी।
त्रिपुर सुंदरी, भैरवी वेशी॥

छिन्नमस्ता, धूमा, मातंगी।
गायत्री तुम बगला रंगी॥

सकल शक्तियां तुम में साजें।
ह्रीं बीज के बीज बिराजें॥

दुष्ट स्तम्भन अरिकुल कीलन।
मारण, वशीकरण, सम्मोहन॥

दुष्टोच्चाटन कारक माता।
अरि जिह्वा कीलक सघाता॥

साधक के विपत्ति की त्राता।
नमो महामाया प्रख्याता॥

मुद्गर शिला लिए अति भारी।
प्रेतासन पर किए सवारी॥

तीन लोक दस दिशा भवानी।
विचरहु तुम हित कल्याणी॥

अरि अरिष्ट सोचे जो जन को।
बुद्धि नाश कर कीलक तन को॥

हाथ-पांव बांधहु तुम ताके।
हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके॥

चोरों का जब संकट आवे।
रण में रिपुओं से घिर जावे॥

अनल, अनिल, विप्लव घहरावे।
वाद-विवाद में निर्णय न पावे॥

मूठ आदि अभिचारण संकट।
राजभय, आपत्ति सन्निकट॥

ध्यान करत सब कष्ट नसावे।
भूत-प्रेत न बाधा आवे॥

सुमिरत राजद्वार बंद जावे।
सभा बीच स्तम्भन छावे॥

नाग, सर्प, बिच्छु आदि भयंकर।
खल विहंग भागहिं सब सत्वर॥

सर्व रोग की नाशनहारी।
अरिकुल मूलोच्छाटन कारी॥

स्त्री-पुरुष राज सम्मोहक।
नमो नमो पीताम्बर सोहक॥

तुमको सदा कुबेर मनावे।
श्री समृद्धि सुयश नित गावें॥

शक्ति-शौर्य की तुम्हीं विधाता।
दुःख-दारिद्र्य विनाशक माता॥

यश, ऐश्वर्य, सिद्धि की दाता।
शत्रु नाशिनी, विजय प्रदाता॥

पीताम्बरा नमो कल्याणी।
नमो माता बगला महारानी॥

जो तुमको सुमिरै चितलाई।
योग-क्षेम से करो सहाई॥

आपत्ति जन की तुरत निवारो।
आधि-व्याधि संकट सब टारो॥

पूजा विधि नहीं जानत तुम्हरी।
अर्थ न आखर करूं निहोरी॥

मैं कुपुत्र अति निवल उपाया।
हाथ जोड़ शरणागत आया॥

जग में केवल तुम्हीं सहारा।
सारे संकट करहुं निवारा॥

नमो महादेवी हे माता।
पीताम्बरा नमो सुखदाता॥

सौम्य रूप धर बनती माता।
सुख-सम्पत्ति सुयश की दाता॥

रौद्र रूप धर शत्रु संहारो।
अरि जिह्वा में मुद्गर मारो॥

नमो महाविद्या आगारा।
आदि शक्ति सुन्दरी अपारा॥

अरि भंजक विपत्ति की त्राता।
दया करो पीताम्बरी माता॥

॥ दोहा ॥
रिद्धि-सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।
मेरी सब बाधा हरो, माँ बगले तत्काल॥

माता बगलामुखी की आरती

जय जय श्री बगलामुखी माता,आरति करहुँ तुम्हारी ।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी ॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै,अस्तुति करहिं सकल नर-नारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी ॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब,भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

पालत हरत सृजत तुम जग को,सब जीवन की हो रखवारी ॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन,करहु हृदय महँ, तुम उजियारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी ॥
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी ॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…

बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय ।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय ॥

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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।