Maa Mahagauri Katha: मां महागौरी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में शरीर त्याग दिया था, तब उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अगले जन्म में भी भगवान शिव को ही पति के रूप में पाएंगी। इसी संकल्प के कारण उनका अगला जन्म पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर हुआ, जहां उनका नाम पार्वती रखा गया।
जब पार्वती जी केवल 8 वर्ष की थीं, तभी उन्हें अपनी साधना के दौरान यह अहसास हुआ कि वे पिछले जन्म में सती थीं और महादेव ही उनके पति हैं। भगवान शिव को दोबारा पाने के लिए उन्होंने राजमहल के सुख-सुविधाएं त्याग दीं और घोर तपस्या करने जंगल चली गईं।
उन्होंने कई वर्षों तक इतनी कठिन तपस्या की कि धूप, धूल और मौसम की मार से उनका शरीर पूरी तरह काला पड़ गया। उनकी अटूट भक्ति देख भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। जब शिव जी ने माता पार्वती पर गंगाजल छिड़का, तो उनका शरीर एकदम दूध जैसा सफेद और कांतिवान हो गया। उनके इसी अत्यंत श्वेत (सफेद) और सुंदर स्वरूप के कारण उनका नाम ‘महागौरी’ पड़ा।
Chaitra Navratri Ashtami Pujan 2026: पूजा कैसे करें?

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मन में व्रत का संकल्प लें।
- एक साफ जगह पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर मां महागौरी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- घी का दीपक जलाएं और मां को कुमकुम का तिलक लगाएं।
- मां को फूलों की माला चढ़ाएं और फिर अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी और अक्षत अर्पित करें।
- मां को नारियल या उससे बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- अंत में मां महागौरी की आरती करें और मंत्र जाप करें।
पूजा के दौरान आप इस आसान मंत्र का जाप कर सकते हैं-
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
Maa Mahagauri Aarti: मां महागौरी की आरती
जय उमा भवानी जय महामाया।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आने वाले का संकट मिटाया।।






















