Kab Hai Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का काफी महत्व होता है। साल 2026 में माघ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाएगा, जो इस महीने का दूसरा प्रदोष व्रत होगा। इस बार Pradosh Vrat January 2026 की पावन तिथि 16 जनवरी, शुक्रवार को पड़ रही है। चूंकि यह व्रत शुक्रवार के दिन है, इसलिए इसे ‘शुक्र प्रदोष’ के नाम से जाना जाएगा। खास बात यह है कि इस दिन मासिक शिवरात्रि और शुक्र प्रदोष का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे भगवान शिव के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का भी यह विशेष अवसर है।
Kab Hai Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग गणना के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी 2026 की रात 08 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि और प्रदोष काल की पूजा के महत्व के कारण, व्रत 16 जनवरी को ही रखा जाएगा। भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ ‘प्रदोष काल’ का समय शाम 05 बजकर 43 मिनट से रात 08 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। भक्तों के पास शिव साधना के लिए कुल 2 घंटे 36 मिनट की शुभ अवधि होगी।
Pradosh Vrat Dates January 2026: प्रदोष व्रत की सूची
1 जनवरी 2026 (गुरुवार): गुरु प्रदोष व्रत (पौष, शुक्ल त्रयोदशी)।
16 जनवरी 2026 (शुक्रवार): शुक्र प्रदोष व्रत (माघ, कृष्ण त्रयोदशी)।
30 जनवरी 2026 (शुक्रवार): शुक्र प्रदोष व्रत (माघ, शुक्ल त्रयोदशी)।
16 जनवरी 2026 (शुक्रवार): शुक्र प्रदोष व्रत (माघ, कृष्ण त्रयोदशी)।
30 जनवरी 2026 (शुक्रवार): शुक्र प्रदोष व्रत (माघ, शुक्ल त्रयोदशी)।
Pradosh Vrat Upay 2026: प्रदोष व्रत के विशेष उपाय

- शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और 108 साबुत अक्षत (चावल) अर्पित करें। महादेव को चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल चढ़ाएं।
- गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करना उत्तम होता है।
- शुक्र प्रदोष होने के कारण मां लक्ष्मी की पूजा करें, उन्हें कमल का फूल और सफेद मिठाई अर्पित करें। इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
- शाम के समय घी का दीपक जलाकर ‘शिव स्तोत्र’ का पाठ करें और जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं जैसे दूध, दही या चावल का दान करें।
- यदि विवाह में बाधा आ रही हो, तो शिव-शक्ति की प्रतिमा पर एक साथ सात बार मौली (कलावा) लपेटें।
Importance of Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में की गई शिव पूजा अक्षय फल प्रदान करती है। यह व्रत अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाकर जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसे ‘मनोकामना पूर्ति’ का व्रत भी कहा जाता है, जिससे संतान, स्वास्थ्य और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। भगवान शिव के साथ माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक संबंधों में मधुरता आती है और परिवार में सुख-सौहार्द बना रहता है।























