मासिक जन्माष्टमी पर बिना इस आरती के अधूरी है लड्डू गोपाल की पूजा, यहां देखें लिरिक्स

Summary :

Krishna Ji Ki Arti Lyrics: पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज, 9 अप्रैल 2026 को वैशाख मास की कृष्ण जन्माष्टमी का पावन व्रत रखा जा रहा है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, लड्डू गोपाल की भक्ति और सेवा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई उपासना से न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती…

Krishna Ji Ki Arti Lyrics: पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज, 9 अप्रैल 2026 को वैशाख मास की कृष्ण जन्माष्टमी का पावन व्रत रखा जा रहा है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, लड्डू गोपाल की भक्ति और सेवा के लिए समर्पित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई उपासना से न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। आज की पूजा बिना कृष्ण जी की आरती के अधूरी मानी जाती है। यहां पर आरती कुंजबिहारी की पूरी लिरिक्स ।

Krishna Ji Ki Arti Lyrics: श्रीकृष्ण जी की आरती

Krishna Ji Ki Arti Lyrics
Krishna Ji Ki Arti Lyrics (Source: Social Media)
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।