मां सिद्धिदात्री की वो पावन कथा, जिससे महादेव को मिलीं अष्ट सिद्धियां, कहलाए “अर्धनारीश्वर”

Summary :

Maa Siddhidatri Ki Katha: आज चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है, जिसे हम नवमी या महानवमी कहते हैं। आज के दिन ही इस पावन त्योहार का समापन हो रहा है और साथ ही आज राम नवमी का उत्सव भी है। नवरात्रि में इस दिन का खास महत्व है क्योंकि आज कन्या पूजन किया जाता है। महानवमी का यह दिन मां के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। मां सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा का नौवां रूप माना जाता है, जो भक्तों को हर तरह की सिद्धियां (शक्तियां) देने वाली हैं। आज के दिन पूरी विधि-विधान से उनकी पूजा करने से रुके…

Maa Siddhidatri Ki Katha: आज चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है, जिसे हम नवमी या महानवमी कहते हैं। आज के दिन ही इस पावन त्योहार का समापन हो रहा है और साथ ही आज राम नवमी का उत्सव भी है। नवरात्रि में इस दिन का खास महत्व है क्योंकि आज कन्या पूजन किया जाता है। महानवमी का यह दिन मां के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है।

मां सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा का नौवां रूप माना जाता है, जो भक्तों को हर तरह की सिद्धियां (शक्तियां) देने वाली हैं। आज के दिन पूरी विधि-विधान से उनकी पूजा करने से रुके हुए सारे काम पूरे हो जाते हैं। पूजा के दौरान मां की कथा पढ़ना बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मां खुश होकर भक्त की हर इच्छा पूरी करती हैं।

Maa Siddhidatri Ki Katha: मां सिद्धिदात्री की कथा

Maa Siddhidatri Ki Katha
Maa Siddhidatri Ki Katha (Source: Social Media)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि अस्तित्व में नहीं थी और चारों ओर केवल घना अंधकार छाया हुआ था, तब भगवान शिव ने ब्रह्मांड के निर्माण हेतु आदि शक्ति की घोर आराधना की। शिव की अटूट तपस्या से प्रसन्न होकर शक्ति दो रूपों में प्रकट हुईं, जिनमें से एक स्वरूप मां सिद्धिदात्री का था।

माना जाता है कि देवी सिद्धिदात्री की कृपा से ही महादेव को आठ दिव्य सिद्धियां- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व—प्राप्त हुईं। मां की इसी असीम अनुकंपा से शिव का आधा शरीर देवी के रूप में परिवर्तित हो गया और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए। यह स्वरूप इस सत्य का प्रतीक है कि शिव और शक्ति परस्पर पूरक हैं और उनके मिलन के बिना सृष्टि का संचालन असंभव है।

एक अन्य प्रसंग के अनुसार, जब असुरराज महिषासुर के आतंक से तीनों लोक कांप उठे और देवताओं को स्वर्ग त्यागना पड़ा, तब सभी देवगण सहायता हेतु त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की शरण में गए। उस समय त्रिदेवों के सामूहिक तेज से एक प्रचंड दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री के रूप में पूजा गया।

देवी ने अपनी अमोघ शक्तियों से न केवल असुरों की विशाल सेना का संहार किया, बल्कि महिषासुर का वध कर देवताओं को पुनः स्वर्ग का अधिकार दिलाया और अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की।

Maa Siddhidatri Mantra: स्तुति, भोग और शुभ रंग

मंत्र: “या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
प्रसाद (भोग): मां को तिल और मेवे से बनी मिठाइयों का भोग लगाना बहुत शुभ होता है।
आज का शुभ रंग: नवमी के दिन बैंगनी रंग के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है, जो तरक्की और आध्यात्म का प्रतीक है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।