Nirjala Ekadashi Per Kya Na Kare: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यकारी एकादशी माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। यह व्रत पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं।
बिना पानी पीए रहने के कारण ही इसे ‘निर्जला’ एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि अगर आप साल भर की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो सिर्फ एक निर्जला एकादशी का उपवास ही काफी है। माना जाता है कि इस अकेले व्रत से आपको साल की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिल जाता है।
Nirjala Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत?

Nirjala Ekadashi Per Kya Na Kare: निर्जला एकादशी पर भूलकर न करें ये 5 काम

1. गलती से भी पानी न पिएं
निर्जला एकादशी का सबसे जरूरी नियम है कि इस दिन पानी नहीं पीना चाहिए। व्रत रखने वाले इंसान को पूरा दिन और पूरी रात बिना पानी पिए भगवान विष्णु की पूजा करनी होती है। आप मुंह साफ करने के लिए गारगल कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि कुल्ले का पानी भी गले से नीचे नहीं उतरना चाहिए। क्योंकि यह व्रत बिना पानी के ही पूरा होता है।
2. अनाज और चावल न खाएं
एकादशी के दिन किसी भी तरह का अनाज खाना मना होता है, और खासकर चावल तो बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चावल खाने से व्रत का फल कम हो जाता है। इसलिए एकादशी पर चावल खाने से बचें।
3. तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें
4. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी बहुत जरूरी होती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना अच्छा नहीं माना जाता। अगर आपको पूजा के लिए तुलसी के पत्ते चाहिए, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
5. गुस्सा, झूठ और लड़ाई-झगड़े से बचें
Nirjala Ekadashi Puja Niyam: ऐसे करें विष्णु पूजन

- एकादशी के दिन सूरज निकलने से पहले उठें, घर साफ करें और नहाकर व्रत रखने का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- रात के समय दीपक जलाएं और भगवान को पीले फूल और पीले फल चढ़ाएं।
- शाम को एक बार फिर भगवान विष्णु की पूजा करें।
- अगले दिन सुबह उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- निर्जला एकादशी पर पानी से भरा कलश दान करना बहुत शुभ होता है, इसलिए ब्राह्मणों को पानी का दान जरूर करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराने और विदा करने के बाद खुद भोजन करके व्रत खोलें।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


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