Som Pradosh Vrat Katha in Hindi: सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा

सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है, एक गरीब विधवा ब्राह्मणी रहती थी जो अपने बेटे के साथ भीख मांगकर गुजारा करती थी। एक दिन उसे रास्ते में घायल अवस्था में विदर्भ का राजकुमार मिला, जिसके राज्य पर शत्रुओं ने कब्जा कर लिया था और उसके पिता को बंदी बना लिया था। ब्राह्मणी उस दयालु राजकुमार को अपने घर ले आई।
रहते-रहते अंशुमति नाम की एक राजकुमारी उस राजकुमार पर मोहित हो गई। बाद में, राजकुमारी के माता-पिता को भगवान शिव ने सपने में आकर दोनों का विवाह करने का आदेश दिया। राजकुमारी के माता-पिता मान गए और दोनों का विवाह करा दिया गया।
ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत करती थी। उस व्रत की शक्ति और गंधर्व सेना की मदद से राजकुमार ने शत्रुओं को हराकर अपना राज्य वापस पा लिया। उसने ब्राह्मणी के बेटे को अपना मंत्री बनाया और सब खुशी-खुशी रहने लगे। मान्यता है कि जैसे भगवान शिव ने ब्राह्मणी के व्रत से राजकुमार और ब्राह्मण पुत्र के दिन बदल दिए, वैसे ही वे अपने सभी भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।




















