
Vivah Panchami Katha in Hindi: विवाह पंचमी की व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के घर श्री राम के रूप में जन्म लिया। वहीं मिथिला के राजा जनक को खेत जोतते समय धरती से एक कन्या प्राप्त हुई, जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री बनाकर ‘सीता’ नाम दिया। जब सीता युवा हुईं, तो राजा जनक ने उनके लिए स्वयंवर रचाया। इसमें यह शर्त रखी गई कि जो भी भगवान शिव के दिव्य और अत्यंत शक्तिशाली धनुष को तोड़ देगा, वही सीता से विवाह कर सकेगा। इस धनुष को तोड़ना लगभग असंभव माना जाता था।
स्वयंवर में अनेक राजकुमार उपस्थित हुए, लेकिन कोई भी उस धनुष को उठा भी नहीं सका। तभी गुरु वशिष्ठ के निर्देश पर वहाँ आए श्रीराम धनुष के समीप पहुँचे। उन्होंने शांत मन से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और खींचते ही वह दो हिस्सों में टूट गया। इस अद्भुत घटना से सभी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद सीता, अपनी सखियों के साथ राम के पास आईं। एक सखी ने उन्हें जयमाला पहनाने का संकेत दिया। उस वक्त उनके हाथ ऐसे दीख रहे थे जैसे कमल के डंठलों समेत दो फूल चाँद को निहारते हुए माला अर्पित कर रहे हों। फिर सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी।

यह दृश्य देखकर देवताओं ने पुष्पवृष्टि शुरू कर दी। नगर और आकाश में ढोल-नगाड़ों की गूंज फैल गई। इसके बाद श्रीराम और सीता का विवाह बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। तभी से हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर माता सीता और प्रभु श्री राम के विवाह दिवस को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी के दिन क्यों नहीं होती शादियां?






















