करनाल: अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रान्तीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने व्यापारियों की बैठक लेने के उपरान्त करनाल क्लब में पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी टैक्स प्रणाली के तहत कपड़ाए साड़ी व अन्य टैक्स फ्री वस्तुओं पर टैक्स लगा दिया है और यहां तक आम उपयोग में आने वाली वस्तुओं पर 28 प्रतिशत व 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया, जबकि पेट्रोल व डीजल जिस पर भारी भरकम एक्साइज ड्यूटी व वेट कर है उसे जीएसटी टैक्स प्रणाली से बाहर रखा हैं। राष्ट्रीय महासचिव बजरंग दास गर्ग ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा कि एक देश एक टैक्स प्रणाली होगी मगर भारत तो एक देश है पर देश में जीएसटी के तहत टैक्स फ्री के अलावा 6 प्रकार के अलग-अलग टैक्स विश्व के अन्य देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा लगाए गए है जो सरासर गलत हैं।
जबकि अन्य देशों में जीएसटी व वेटकर टैक्स फ्री के अलावा अधिकतम टैक्स कि दरें कनाडा, ताइवान, बहरीन, जर्सी में 5 प्रतिशत, मलोशिया में 6 प्रतिशत, सिंगापुर, तंजानिया में 7 प्रतिशत, बहमास, अमेरिका में 7.5 प्रतिशत, जापान में 8 प्रतिशत, स्विट्जलैंड में 8 प्रतिशत से 3.8 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, कोरिया, मंगोलिया में 10 प्रतिशत, कजाखिस्तान में 12 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका में 14 प्रतिशत, चीन में 17 प्रतिशत आदि देशों में हैं। जबकि विश्व के लगभग 50 प्रतिशत देशों में जीएसटी लागू नहीं हैं। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने किसान की खेती में उपयोग आने वाला ट्रैक्टर व उसके स्पेयर पार्ट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया है यहां तक कि खाद्ध व खेती में उपयोग आने वाली दवाईयों पर भी टैक्स लगाया गया है जो अगरबती व धूप भगवान कि पूजा के काम आती है उस पर भी 12 प्रतिशत टैक्स लगाया गया हैं।
राष्ट्रीय महासचिव बजरंग दास गर्ग ने कहा कि जब केंद्र सरकार देश में एक टैक्स प्रणाली लागू करने की बात कर रही है तो ऐसे में देश के किसी भी राज्य की सरकार को अलग से टैक्स लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जबकि हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में मार्केट फ ीस ;मंडी टैक्स लगाना उचित नहीं हैं। देश में जीएसटी लागू होने पर प्रदेश में मार्केट फ ीस ;मंडी टैक्स नहीं लगाना चाहिए। इससे किसान को अपनी फसल के पूरे दाम नहीं मिलेगे।श्री गर्ग ने कहा कि जीएसटी टैक्स प्रणाली में व्यापारी उलझ कर ही रह जाएगा। क्योंकि व्यापारी जो तीन महीने में एक रिर्टन भरता था अब उसे एक महीने में तीन रिर्टन आइटम वाइज भरनी होगी। जबकि व्यापारियों को अभी तक यह पता नहीं है कि किस वस्तु पर कितना टैक्स है या टैक्स फी है देश के कपड़ा व्यापारियों के साथ-साथ अन्य ट्रेड के काफ ी व्यापारियों ने अभी तक जीएसटी नम्बर तक नहीं लिए है ना ही अभी तक व्यापारियों को जीएसटी टैक्स प्रणाली की पूरी जानकारी है ऐसे में व्यापारी किस प्रकार जीएसटी टैक्स प्रणाली के तहत अपना व्यापार कर पाएगा। जबकि एक महीने से देश में व्यापार व उद्योग पूरी तरह से ठप्प पड़ा हैं।
– आशुतोष गौतम, महिन्द्र


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