माटी से शिखर तक… हरियाणा BJP अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली का संघर्ष और संकल्प, पंजाब केसरी से खास साक्षात्कार

Mohan Lal Badoli

Mohan Lal Badoli: भारतीय जनता पार्टी के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष और राई से पूर्व विधायक मोहन लाल बड़ौली का जीवन केवल एक राजनैतिक यात्रा नहीं, बल्कि शून्य से शिखर तक पहुँचने के कड़े पुरुषार्थ की कहानी है। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले बड़ौली आज प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं, लेकिन उनका यह सफर खेतों की धूल, छोटी दुकानों की व्यस्तता और संगठन की दरी बिछाने वाले एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था।
हाल ही में एक विशेष भेंटवार्ता के दौरान बड़ौली जी ने अपने जीवन के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला जिन्होंने उन्हें एक कुशल राजनेता और सफल उद्यमी बनाया।

Mohan Lal Badoli
Mohan Lal Badoli (Image- Social Media)

1. बचपन और शिक्षा: सरकारी स्कूल से जीवन के सबक

मोहन लाल बड़ौली का जन्म सोनीपत के एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ। उनके व्यक्तित्व में जो सादगी और धैर्य दिखता है, वह उनके बचपन की देन है।

किसान पुत्र: बचपन में पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेतों में हल चलाया और फसलों की देखभाल की। बड़ौली बताते हैं कि किसानी ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का गुण सिखाया।

सरकारी पाठशाला: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। अभावों के बीच भी उन्होंने अपनी शिक्षा और संस्कारों से कभी समझौता नहीं किया।

2. उद्यमी का संघर्ष: कपड़े की दुकान से सफल व्यवसाय तक

राजनीति में आने से पहले और सक्रिय राजनीति के शुरुआती दिनों में बड़ौली ने स्वयं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।

जन-संवाद का केंद्र (कपड़े की दुकान): उन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत कपड़े की एक छोटी दुकान से की। उन्होंने साझा किया कि यही वह स्थान था जहाँ वे आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और उनकी नब्ज को समझने लगे। लोगों से मिलना-जुलना और उनके सुख-दुख में शामिल होना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।

व्यापारिक सूझबूझ: कपड़े के काम में सफलता के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यापार का विस्तार किया और पेट्रोल पंप (हंस फिलिंग स्टेशन) जैसे व्यवसायों में कदम रखा। आज वे एक कामयाब व्यापारी के रूप में जाने जाते हैं, जो यह दर्शाता है कि एक साधारण व्यक्ति भी मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।

3. ‘राम मंदिर वाली पार्टी’ से ‘सर्वव्यापी भाजपा’ तक का सफर

बड़ौली का नाता RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और भाजपा की विचारधारा से तब से है, जब प्रदेश में पार्टी की स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण थी।

वैचारिक निष्ठा: बड़ौली ने उन दिनों को याद किया जब हरियाणा में भाजपा को केवल “मंदिर वाली पार्टी” के नाम से जाना जाता था। लोग कहते थे कि भाजपा केवल राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति करती है।

आंदोलनकारी भूमिका: वे राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान पूरी तरह सक्रिय रहे। उन्होंने न केवल रैलियों और सभाओं का आयोजन किया, बल्कि हर गाँव में जाकर लोगों को विचारधारा से जोड़ा। आज जब भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, तो बड़ौली इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक और वैचारिक जीत मानते हैं।

4. संगठन के प्रति समर्पण: “फोन पर उपलब्ध रहने वाला कार्यकर्ता”

साक्षात्कार में जब उनसे उनकी कार्यशैली के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पद के मोह में नहीं बल्कि जिम्मेदारी के भाव से काम करते हैं।

जमीनी पकड़: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बड़ौली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे आज भी एक साधारण कार्यकर्ता की तरह सुलभ हैं। वे स्वयं फोन उठाते हैं और प्रदेश के किसी भी कोने से आए कार्यकर्ता की समस्या सुनते हैं।

जिम्मेदारी का निर्वहन: बड़ौली ने कहा, “मैं भाजपा का जमीन से जुड़ा कार्यकर्ता हूँ। मैं जमीनी हकीकत को समझता हूँ क्योंकि मैंने खुद बूथ स्तर पर दरी बिछाने से लेकर पोस्टर लगाने तक का काम किया है। संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी है, मेरा उद्देश्य उसे अंतिम व्यक्ति (अंत्योदय) की सेवा तक ले जाना है।”

मोहन लाल बड़ौली का जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदारी, मेहनत और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा किसी भी व्यक्ति को सफलता के सर्वोच्च पायदान पर पहुँचा सकती है। वे आज हरियाणा में भाजपा के उन स्तंभों में से एक हैं जो पुराने कार्यकर्ताओं और नए युवाओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: MSME को बड़ा फायदा, 25 करोड़ निवेश और 50 कर्मचारियों पर भी मिलेगा प्रोत्साहन, पंजाब की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लॉन्च

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

Related Posts

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।