गुजरात बना विकास का अग्रदूत, नई औद्योगिक नीति से भविष्य को नई दिशा

Summary :

ववीता चौहान Gujarat : देश में औद्योगिक और निर्यात वृद्धि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए गुजरात एक बार फिर अग्रणी राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। “गुजरात विशेष आर्थिक क्षेत्र एवं निर्यात उन्मुख इकाई संपर्क कार्यक्रम, उपलब्धियां और भविष्य की रूपरेखा” के दौरान प्रस्तुत आंकड़े और दृष्टिकोण यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य आने वाले समय में भी आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। पिछले एक दशक में भारत के व्यापार और निर्यात तंत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। नीतिगत सुधार, डिजिटल प्रशासन, व्यापार में सुगमता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ते समन्वय के…

ववीता चौहान

Gujarat : देश में औद्योगिक और निर्यात वृद्धि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए गुजरात एक बार फिर अग्रणी राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। “गुजरात विशेष आर्थिक क्षेत्र एवं निर्यात उन्मुख इकाई संपर्क कार्यक्रम, उपलब्धियां और भविष्य की रूपरेखा” के दौरान प्रस्तुत आंकड़े और दृष्टिकोण यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य आने वाले समय में भी आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। पिछले एक दशक में भारत के व्यापार और निर्यात तंत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है।

नीतिगत सुधार, डिजिटल प्रशासन, व्यापार में सुगमता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ते समन्वय के कारण देश का कुल निर्यात लगभग 441 अरब डॉलर से बढ़कर 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस विकास में गुजरात का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जहां से लगभग 110 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर सचिव अजय भादू ने बताया कि सरकार द्वारा व्यापार को सरल बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।

साथ ही 2025–26 से 2030–31 तक ₹25,600 करोड़ की लागत से निर्यात संवर्धन मिशन प्रारंभ किया गया है, जिससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को मजबूती मिलेगी और भारत का वैश्विक मूल्य श्रृंखला में समावेश तेज होगा। गुजरात के विशेष आर्थिक क्षेत्र इस विकास के प्रमुख आधार स्तंभ बनकर उभरे हैं।

वर्तमान में गुजरात की भागीदारी

राज्य के विशेष आर्थिक क्षेत्रों से होने वाला निर्यात 2014–15 में ₹1.79 लाख करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹3 लाख करोड़ से अधिक हो गया है, जो लगभग 67 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वर्तमान में देश के कुल विशेष आर्थिक क्षेत्र निर्यात में गुजरात की भागीदारी लगभग 21 प्रतिशत है। निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

विशेष आर्थिक क्षेत्रों में निवेश ₹1.22 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.28 लाख करोड़ हो गया है, जबकि रोजगार के अवसर 63 हजार से बढ़कर 2.22 लाख से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही गुजरात उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।

अर्धचालक क्षेत्र में हो रहे निवेश और नई परियोजनाओं ने राज्य को तकनीकी क्षेत्र में भी सशक्त पहचान दिलाई है। औद्योगिक विकास के आंकड़े भी इस प्रगति की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2013–14 में जहां राज्य में लगभग 22,876 कारखाने थे, वहीं वर्ष 2023–24 तक यह संख्या बढ़कर 33,311 हो गई। औद्योगिक उत्पादन भी दोगुने से अधिक बढ़कर ₹26.39 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026

राज्य सरकार ने इस विकास को और गति देने के लिए 15 जून 2026 को “विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026” की घोषणा की है। इस नीति का उद्देश्य गुजरात को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का केंद्र बनाना है। नीति के अंतर्गत 21 प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है और उद्योगों के लिए “अपना प्रोत्साहन चुनें” जैसी पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। नई नीति में अनुसंधान एवं विकास, हरित ऊर्जा, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, महिला उद्यमिता, प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों तथा कौशल विकास पर विशेष बल दिया गया है, जिससे राज्य में संतुलित और सतत औद्योगिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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Avinay