कर्ज मुक्ति के 5 सूत्र, इससे आसानी से दूर होगी आर्थिक तंगी

Summary :

आप चाहें किसी भी राशि या लग्न के स्वामी हो। ज्योतिष में कुछ सूत्र इस तरह के होते हैं जो सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। उदाहरण के लिए ग्रहों के कुछ नैसर्गिक गुण दोष होते हैं वह सभी लोगों के लिए समान रूप से काम करते हैं। इसी प्रकार से कुछ दूसरे सूत्र भी हैं, जिनको आप समान रूप से सभी लोगों पर लागू कर सकते हैं। यह भी पढ़ें- Copper Sun Benefits: तांबे से बना हुआ सूर्य का प्रतीक, दिलाएगा आपको प्रसिद्धि और पद मैं यहां 5 सूत्र बता रहा हूं। यदि कोई व्यक्ति वर्षों से…

Karj Mukti Ke Upay

आप चाहें किसी भी राशि या लग्न के स्वामी हो। ज्योतिष में कुछ सूत्र इस तरह के होते हैं जो सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। उदाहरण के लिए ग्रहों के कुछ नैसर्गिक गुण दोष होते हैं वह सभी लोगों के लिए समान रूप से काम करते हैं। इसी प्रकार से कुछ दूसरे सूत्र भी हैं, जिनको आप समान रूप से सभी लोगों पर लागू कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- Copper Sun Benefits: तांबे से बना हुआ सूर्य का प्रतीक, दिलाएगा आपको प्रसिद्धि और पद

मैं यहां 5 सूत्र बता रहा हूं। यदि कोई व्यक्ति वर्षों से कर्जदार है तो इन पांच सूत्रों को काम में ले तो निश्चित रूप से कर्ज बढ़ना रुक जाता है। ऋण होने कई कारण होते हैं इसीलिए ऋण का पूरी तरह से समाप्त होना बहुत सी बातों पर निर्भर करता है। इन सूत्रों को काम में लेने से आपका ऋण बढ़ना रुक जाता है।

1- प्रातः उठते ही भूमि पर पांव रखने से पूर्व भूमि को नमस्कार करें। यदि यह आप प्रतिदिन नहीं कर पाते हैं तो मंगलवार को अवश्य ऐसा करना चाहिए।

2- “ॐ क्रां क्रीं क्रों सः भौमाय नमः” की पांच माला प्रतिदिन करें। इसका आरंभ मंगलवार से करें। ध्यान रखना है कि समय लगभग निश्चित हो। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मंत्रों की संख्या कम या ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

3- साल में कम से कम 1 बार मंगलवार को प्रातः 10:00 बजे से पहले-पहले ब्लड डोनेट करें।

4- मंगलवार का व्रत रखें और संभव हो तो मंगलवार को ऋण की कुछ राशि चुकता करें। जिस मंगलवार को व्रत रखा गया हो उस दिन लाल वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए।

5- घर के मंदिर में श्री मंगल यंत्र की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। मंगल यंत्र हमेशा स्वर्ण, चांदी या तांबे की शीट पर बना होना चाहिए।

Astrologer Satyanarayan Jangid
WhatsApp- 6375962521

Astrologer Satyanarayan Jangid