नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार के प्रसार से जुड़ी याचिकाओं की आगे सुनवाई से खुद को दूर रखने का फैसला किया। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस रोग का मुकाबला करने के लिए आवश्यक कदम उठाये गए हैं। उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामों पर गौर किया, जिनमें कहा गया है कि 100 से अधिक मौतों का कारण बने चमकी बुखार (अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का मुकाबला करने के लिए वे सहयोग कर रहे हैं तथा इससे लड़ने के लिए साथ मिल कर काम कर रहे हैं।
शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘बिहार (सरकार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के हलफनामों पर गौर करते हुए तथा बिहार के विभिन्न हिस्सों में चमकी बुखार की समस्या से लड़ने के लिए उठाये गए कदमों को मद्देनजर रखते हुए हम इन रिट याचिकाओं की ओर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं।’’ प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यदि याचिकाओं में कोई और शिकायत है तो वे लोग पटना उच्च न्यायालय का रूख करने के लिए स्वतंत्र हैं। रिट याचिकाओं का यथोचित निपटारा किया जाएगा। किसी अन्य लंबित अर्जी का निपटारा हो गया माना जाएगा।
पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर नाराजगी जताई कि याचिकाकर्ता ने चिकित्सकों की 57 फीसदी कमी जैसे मुद्दे उठाये है। न्यायालय ने कहा, ‘‘आप चाहते हैं कि हम डॉक्टरों की रिक्तियों को भरने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करें। आप पटना उच्च न्यायालय जाइए।’’ गौरतलब है कि शीर्ष न्यायालय ने अधिवक्ता मनोहर प्रताप की याचिका पर 24 जून को संज्ञान लिया था। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार को राज्य में मेडिकल सुविधाओं, पोषण और स्वच्छता तथा स्वच्छता परिस्थितियों की उपलब्धता पर अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा था।


Download Android App
Download iOS App



