नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। एक ऐसी लड़ाई, जो दशकों से जारी है और अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस इस बार सिर्फ जागरूकता का दिन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है, जहां विज्ञान, रणनीति और वैश्विक इच्छाशक्ति एक साथ खड़ी हैं। अभूतपूर्व गति से हो रही वैज्ञानिक प्रगति ने पहली बार यह भरोसा पैदा किया है कि हमारे ही जीवनकाल में मलेरिया का उन्मूलन संभव है।
नए टीके, प्रभावी उपचार, आधुनिक नियंत्रण उपकरण और मच्छरों के आनुवंशिक संशोधन जैसी उन्नत तकनीकें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इंजेक्शन जैसे नवाचार भी विकास के चरण में हैं, जबकि 25 देश पहले ही हर साल एक करोड़ बच्चों को टीकों के जरिए सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण के मोर्चे पर अगली पीढ़ी की मच्छरदानियां (नेक्स्ट जेनरेशन मॉसक्विटो नेट) अब 84 प्रतिशत वितरण में शामिल हैं और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम जमीनी बदलाव ला रहे हैं। यह वह क्षण है, जब उम्मीद पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रही है।
इसी पृष्ठभूमि में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने साझेदारों के साथ ‘मलेरिया का उन्मूलन करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा।’ अभियान की शुरुआत की है, जो केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वैश्विक आह्वान है। यह दुनिया को याद दिलाता है कि समय हमारे पक्ष में है, लेकिन निर्णायक कदम उठाने की जरूरत अभी है। पिछले दो दशकों में मिली सफलताएं इस विश्वास को और मजबूत करती हैं। वर्ष 2000 से अब तक लाखों मामलों और करोड़ों मौतों को टाला जा चुका है।
47 देशों को मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जिनमें हाल के वर्षों में भी नए देश शामिल हुए हैं। कई देशों में मामलों की संख्या हजार से नीचे आ गई है और ग्रेटर मेकांग उपक्षेत्र ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों और दवा प्रतिरोध के बावजूद भी लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट हासिल की जा सकती है। फिर भी, यह तस्वीर पूरी तरह आश्वस्त करने वाली नहीं है। 2000 से 2024 के बीच मलेरिया-ग्रस्त देशों की संख्या में गिरावट जरूर आई है और कम मामलों वाले देशों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्थिति ठहरी हुई सी है।
2024 में अनुमानित 282 मिलियन मामले और 6 लाख 10 हजार मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी वृद्धि को दर्शाती हैं। यह संकेत है कि प्रगति के बावजूद खतरा टला नहीं है। विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 इस बात को और स्पष्ट करती है कि उपलब्धियां खतरे में हैं और चुनौतियां जटिल होती जा रही हैं।
दवा प्रतिरोध एक गंभीर चिंता बनकर उभर रहा है, जहां अफ्रीका के कई देशों में आर्टेमिसिनिन के प्रति आंशिक प्रतिरोध सामने आया है और इसके फैलने का खतरा बना हुआ है। कीटनाशकों के प्रति मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। वित्तीय संसाधनों की भारी कमी, वैश्विक स्वास्थ्य सहायता में कटौती और जलवायु परिवर्तन, संघर्ष तथा मानवीय संकट जैसी परिस्थितियां इस लड़ाई को और कठिन बना रही हैं।
इसके बावजूद उम्मीद के कई उजले बिंदु सामने हैं। नई पीढ़ी के अधिक प्रभावी मच्छरदानियों का तेजी से विस्तार हुआ है, टीकाकरण अभियान लाखों बच्चों को सुरक्षा दे रहे हैं और मौसमी तथा बारहमासी रासायनिक रोकथाम कार्यक्रम करोड़ों बच्चों तक पहुंच चुके हैं। अब पहले की तुलना में ज्यादा बच्चों का समय पर परीक्षण हो रहा है और उन्हें प्रभावी दवाएं मिल रही हैं, जिससे मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिल रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीतियों का निर्माण इस लड़ाई की नींव है। वैश्विक साझेदारों के बीच स्थिर और समन्वित सहयोग ही दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित कर सकता है, जबकि अनुसंधान और नवाचार में निवेश नई चुनौतियों से निपटने का रास्ता खोलता है। सबसे अहम भूमिका समुदायों की है, जिन्हें सशक्त बनाकर इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाना होगा।
आज जब हमारे पास साधन, तकनीक और ज्ञान मौजूद हैं, तो यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि आखिर मलेरिया से किसी की जान क्यों जाए। विश्व मलेरिया दिवस 2026 इसी सोच को केंद्र में रखता है, यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक निर्णायक संदेश है कि अगर हम अभी नहीं जागे, तो यह अवसर हाथ से निकल सकता है। लेकिन अगर हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो मलेरिया का अंत केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है।
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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