अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री के चादर चढ़ाने का विरोध, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

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Ajmer Sharif Dargah: अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सालाना उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले का अजमेर कोर्ट में चल रहे मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत फैसला नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट…

Ajmer Sharif Dargah: अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सालाना उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले का अजमेर कोर्ट में चल रहे मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत फैसला नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों का अजमेर की अदालत में दरगाह द्वारा शंकर मोचन महादेव मंदिर पर कथित “अवैध कब्जे” के संबंध में लंबित मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Supreme Court News: नेहरू जी ने शुरू की थी चादर चढ़ाने की परंपरा

Ajmer Sharif Dargah
Ajmer Sharif Dargah (Image- Social Media)

यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1947 में पहली बार अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने की परंपरा शुरू की थी और इसके बाद हर साल यह परंपरा निभाई जाती रही, लेकिन यह प्रथा ना तो किसी कानून में लिखी है और ना ही यह संविधान के अनुरूप है।

दरगाह के स्थान पर पहले एक प्राचीन शिव मंदिर था

याचिका में यह भी दावा किया गया कि इस दरगाह के स्थान पर पहले एक प्राचीन शिव मंदिर था। इस विषय पर पहले ही अजमेर कोर्ट में एक मामला विचाराधीन है। ऐसे में याचिकाकर्ता का तर्क था कि पेंडिंग केस के दौरान चादर चढ़ाने की परंपरा उस मामले को प्रभावित कर सकती है।

PM मोदी की ओर से दरगाह में चादर चढ़ाई

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Ajmer Sharif Dargah (Image- Social Media)

गौरतलब है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स पर 22 दिसंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की ओर से अजमेर दरगाह में चादर और फूल चढ़ाए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने सम्मान के प्रतीक के रूप में पवित्र दरगाह पर चादर चढ़ाई। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की तरफ से अलग चादर चढ़ाई थी।

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।