नई दिल्ली: डोकलाम विवाद भले ही खत्म हो गया हो लेकिन खतरे की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। इस बात का अंदाजा आज सेनाध्यक्ष बिपिन रावत के बयान से लगाया जा सकता है। सेनाध्यक्ष ने चीन और पाकिस्तान से सावधान करते हुए कहा, “सेना को नहीं पूरे राष्ट्र को चीन और पाकिस्तान से एक साथ युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान से लड़ाई की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। उत्तर की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी ताकत दिखाना शुरू किया है। ‘सलामी स्लाइसिंह’, यानी धीरे-धीरे भूभाग पर कब्जा करना, और दूसरे की सहने की क्षमता को परखना, चिंता का विषय है। हमें इस प्रकार की धीरे धीरे उभरती स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। सेना प्रमुख ने चीन के संबंध में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उत्तर की स्थिति के चलते पश्चिम से पाकिस्तान भी मौके का फायदा उठाना चाहे। उन्होंने चीन और पाकिस्तान की नजदीकी की बात भी कही। यह पहली बार नहीं है जब चीन और पाकिस्तान को लेकर सेना प्रमुख ने इस प्रकार से दो फ्रंट पर युद्ध वाला बयान दिया है। दर्शाता है कि भारत सेना चीन के साथ पनपी स्थिति को लेकर कितनी संवेदनशील है। सेना प्रमुख का यह बयान तब आया है जब चीन में हाल ही भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सीमा पर विवादों को शांतिप्रिय ढंग से सुलझाने के लिए और प्रयासों पर बल दिया था। शी चिनफिंग ने कहा कि दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि हम सही रास्तों पर चलें।
बता दें कि जून के मध्य भारतीय सेना ने सिक्किम की सीमा पार कर भूटान के इलाके में डोकलाम पर चीन के सड़क निर्माण कार्य को रोका था। भारत इस मामले में भूटान के दावे के समर्थन में वहां खड़ा था। चीन इस बात से नाराज हुआ और उसने भारत पर उसके भूभाग में घुसने का आरोप लगाया.
भारत ने साफ कहा कि यह नई सड़क उसके उत्तर पूर्व राज्यों के लिए रणनीतिक खतरा पैदा करती है। यहां पर भारत और चीन के सैनिक करीब 70 दिनों तक नॉन कॉम्बैटिव मोड में एक दूसरे के सामने खड़े रहे। बाद में चीन ने सड़क निर्माण का साजोसामान वहां से हटाया और दोनों ओर के सैनिक अपनी अपनी बैरिकों में लौट गए।
वहीं, भारत ने जापान के साथ अपने सैनिक संबंधों को बढ़ाया है। भारत के रक्षामंत्री अरुण जेटली ने जापान के साथ इस संबंध में कुछ समझौते किए हैं। निर्मला सीतारमण गुरुवार को रक्षामंत्री का कार्यभार संभालेंगी। माना जा रहा है कि जापान के साथ भारत के इस प्रकार के संबंध बढ़ाने से चीन को नाराजगी होगी। जापान और भारत की सेनाएं अगले साल साझा एंटी टेरिज्म अभ्यास करेंगी। यह पहली बार होगा जब दोनों देश की सेनाएं ऐसे किसी अभ्यास में साथ नजर आएंगी।


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