हरिद्वार, 8 जुलाई (आईएनएस)। श्री बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में उत्तराखंड सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरिद्वार में स्पष्ट कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
हरिद्वार में मुरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले की जांच के लिए समिति का गठन किया जा चुका है। सरकार पहले ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर चुकी है और आगे भी जांच के आधार पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। दान-चढ़ावे में गड़बड़ी अत्यंत गंभीर मामला है। यह आस्था के साथ विश्वासघात है।
सीएम धामी ने इसे गौहत्या और अपने माता-पिता की हत्या के समान गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसा कृत्य किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है। एसआईटी सभी तथ्यों की गहनता से जांच कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उधर, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। वहीं, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेश में मानसून की तैयारियों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में मानसून सक्रिय हो चुका है और अगले दस दिनों तक कई जिलों में हाई अलर्ट जारी रहेगा। सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
–आईएएनएस
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