बद्रीनाथ धाम में आस्था का माहौल, देश-विदेश से श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

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चमोली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड की पवित्र धरती पर इस समय माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्साह से भरा हुआ है। गुरुवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट विधिवत रूप से खोल दिए गए। इसके बाद से हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंच रहे हैं और हर तरफ आस्था, उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अब चारों धाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी धामों में यात्रियों के लिए पूरी व्यवस्था की गई है,…

चमोली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड की पवित्र धरती पर इस समय माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्साह से भरा हुआ है। गुरुवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट विधिवत रूप से खोल दिए गए। इसके बाद से हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंच रहे हैं और हर तरफ आस्था, उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अब चारों धाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी धामों में यात्रियों के लिए पूरी व्यवस्था की गई है, ताकि किसी को किसी तरह की परेशानी न हो। सीएम ने बताया कि इस बार यात्रा शुरू होने से पहले और पिछले सालों में लगातार बर्फबारी होती रही, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रशासन ने सभी इंतजाम समय रहते पूरे कर लिए।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरा उत्तराखंड तैयार है। चाहे सड़क हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों, रहने की व्यवस्था हो या सुरक्षा, हर जगह प्रशासन पूरी मेहनत से काम कर रहा है। आने वाले सभी भक्तों का स्वागत और अभिनंदन है और उम्मीद है कि सभी की यात्रा सुखद और सफल होगी।

सीएम धामी ने बद्रीनाथ धाम का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि यह भगवान बद्री विशाल की पवित्र नगरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में इस धाम के विकास के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करवाया था, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। अब बद्रीनाथ धाम का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है और इसे ‘भव्य बद्री, दिव्य बद्री’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। हालांकि, इसके साथ ही इसकी धार्मिक पवित्रता और मूल स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा रहा है।

उन्होंने माणा गांव का भी उल्लेख किया, जिसे पहले भारत का अंतिम गांव कहा जाता था। सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री खुद यहां आ चुके हैं और इसके बाद इस गांव का तेजी से विकास हुआ है। अब इसे ‘पहला गांव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां की मातृशक्ति ने भी कमाल का काम किया है और वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देते हुए कई महिलाएं आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

सीएम ने श्रद्धालुओं से यह भी अनुरोध किया कि वे केवल चारधाम तक ही सीमित न रहें, बल्कि आसपास के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का भी भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र केवल यात्रा का स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। यहां आकर व्यक्ति को एक अलग ही अनुभव मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालय पूरे देश का आध्यात्मिक मंच है, जहां से निकली बातें पूरे देश और दुनिया में जाती हैं। इसलिए यहां आकर व्यक्ति को जीवन का वास्तविक अर्थ समझने का अवसर मिलता है।

इसी बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी बद्रीनाथ पहुंचे। उन्होंने कहा कि देवताओं ने एक बार फिर मनुष्यों को भगवान के मंदिर में पूजा करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मनुष्य जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि हमें भगवान के निजी निवास में पूजा का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आज सुबह सवा 6 बजे विधि विधान के साथ भगवान बद्रीनाथ के कपाट खोले गए। अब चारों धाम के कपाट खुल चुके हैं और श्रद्धालु दर्शन के लिए आ सकते हैं। उन्होंने देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यदि मन में यात्रा की इच्छा हो तो उसे दबाएं नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ आएं।

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा केवल भौतिक आनंद के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति और अनुभव के लिए है। यहां आकर व्यक्ति को संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ दर्शन करना चाहिए। उन्होंने हिमालय को पूरे देश का मंच बताते हुए कहा कि यहां से निकली हर बात दूर तक जाती है, इसलिए यहां का अनुभव बहुत गहरा होता है।

पांडु क्षेत्र की महिला मंगल दल अध्यक्ष बिना पवार ने बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट छह महीने के लिए खुले हैं। हर साल की तरह इस बार भी कपाट खुलने का इंतजार बड़े उत्साह से किया गया। इसी तरह संगीता मेहता ने बताया कि यह दिन उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि कपाट खुलने के अवसर पर उन्होंने महिला मंगल दल के साथ मिलकर भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए। उन्होंने बताया कि यह परंपरा हर साल श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

एक अन्य कलाकार श्रद्धापति ने बताया कि उन्होंने अभिषेक यादव के साथ मिलकर देवनागरी लिपि में बद्रीनाथ धाम के स्टकचर के ऊपर कैलीग्राफी की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इससे पहले सबसे ऊंचे शिव मंदिर तृतीय केदार तुंगनाथ जी में विश्व रिकॉर्ड बनाया था और अब बद्रीनाथ धाम में अपनी कला दिखाने का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है।

श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि उनकी शादी को अभी दो महीने ही हुए हैं और उनके पति उन्हें पहली बार सीधे बद्रीनाथ धाम लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले वह कभी कहीं नहीं गई थीं और यह यात्रा उनके लिए बेहद भावुक और यादगार है।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि यह दिन बहुत पवित्र है क्योंकि सुबह सवा 6 बजे भगवान बद्री विशाल के कपाट खुले। उन्होंने कहा कि सरकार ने अच्छी व्यवस्थाएं की हैं और धीरे-धीरे भीड़ बढ़ रही है, लेकिन दर्शन सुचारू रूप से हो रहे हैं।

हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यात्रा में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन प्रशासन लगातार सुधार कर रहा है। मंदिर समिति और सरकार मिलकर यात्रियों की सुविधा पर ध्यान दे रहे हैं।

एक अन्य प्रतिनिधि ने बताया कि इस समय देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि हर यात्री को आसानी से दर्शन मिलें और यात्रा सुरक्षित हो।

–आईएएनएस

पीआईएम/एएस

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