बेंगलुरु, 24 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु में सड़क किनारे पार्किंग के लिए प्रस्तावित वार्षिक शुल्क को लेकर राज्य के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे पहले से महंगाई की मार झेल रहे मध्यम वर्ग और आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, ईंधन, जीएसटी, टोल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ऋणों के खर्च के बीच लोगों पर नया वित्तीय भार डालना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के कई पुराने आवासीय इलाकों और अपार्टमेंट्स में रहने वाले परिवारों के पास अपने परिसरों के भीतर पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण अवैध और लंबे समय तक होने वाली सड़क किनारे पार्किंग को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन लोगों के भवनों में पार्किंग की सुविधा नहीं है और जो नियमित रूप से वाहन उपयोग करते हैं, उन्हें इस शुल्क से छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए।
रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि अंतिम फैसला लेने से पहले बेंगलुरु के विधायकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों और संबंधित अधिकारियों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
दरअसल, ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 के मसौदे के तहत शहर में सड़क किनारे पार्किंग के लिए नया शुल्क ढांचा प्रस्तावित किया गया है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो आवासीय क्षेत्रों में सड़क पर वाहन खड़ा करने के लिए वाहन मालिकों को वार्षिक परमिट लेना होगा।
नए मसौदे में छोटी कारों के लिए वार्षिक पार्किंग परमिट शुल्क 15,000 रुपए, सेडान कारों के लिए 20,000 रुपए, एसयूवी वाहनों के लिए 25,000 रुपए वार्षिक शुल्क प्रस्तावित है।
इसके अलावा गैर-आवासीय क्षेत्रों में सड़क किनारे पार्किंग के लिए प्रति घंटे शुल्क भी निर्धारित करने का प्रस्ताव है, जिसमें कारों के लिए 40 से 80 रुपए प्रति घंटा, दोपहिया वाहनों के लिए 20 से 40 रुपए प्रति घंटा शुल्क लिया जा सकता है। पार्किंग शुल्क संबंधित सड़क की श्रेणी और क्षेत्र के आधार पर तय किया जाएगा।
प्रस्ताव सामने आने के बाद बेंगलुरु में इसे लेकर बहस तेज हो गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगेगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। वहीं आलोचकों का कहना है कि पर्याप्त सार्वजनिक पार्किंग व्यवस्था विकसित किए बिना इस तरह का शुल्क लागू करना आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
–आईएएनएस
एए्मटी/डीकेपी
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