भोपाल में जल संकट के आसार, नलकूप खनन पर लगी रोक

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भोपाल, 13 मार्च (आईएएनएस)। गर्मी की दस्तक के साथ मध्य प्रदेश में जल संकट के आसार बनने लगे हैं। यही कारण है कि राजधानी भोपाल के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नलकूप खनन पर रोक लगा दी है। राजधानी भोपाल में भू-जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सिंह द्वारा मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए संपूर्ण भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अवगत कराया है कि जिले में कृषि एवं व्यावसायिक कार्यों के लिए भू-जल स्त्रोतों का…

भोपाल, 13 मार्च (आईएएनएस)। गर्मी की दस्तक के साथ मध्य प्रदेश में जल संकट के आसार बनने लगे हैं। यही कारण है कि राजधानी भोपाल के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नलकूप खनन पर रोक लगा दी है।

राजधानी भोपाल में भू-जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सिंह द्वारा मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए संपूर्ण भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अवगत कराया है कि जिले में कृषि एवं व्यावसायिक कार्यों के लिए भू-जल स्त्रोतों का अत्यधिक दोहन होने से पेयजल स्त्रोतों तथा नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है।

प्रशासन ने आशंका जताई है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही तो आगामी ग्रीष्मकाल में जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए अधिनियम की धारा 6 (1) के अंतर्गत संपूर्ण भोपाल जिले में अशासकीय एवं निजी नलकूपों के नए खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी तथा बिना अनुमति के नए नलकूप का खनन नहीं किया जा सकेगा। सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट रहेगी।

राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है अथवा प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तत्काल जप्त कर संबंधित थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की जाए। कलेक्टर द्वारा सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उनके क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थितियों में उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति देने हेतु अधिकृत किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत दो हजार रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक के कारावास अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है। हालांकि यह आदेश शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा।

जारी किए गए आदेश के अनुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा योजनाओं के तहत आवश्यकतानुसार नलकूप खनन का कार्य किया जा सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर नवीन निजी नलकूपों एवं अन्य विद्यमान निजी जल स्त्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिनियम की धारा-4 के अंतर्गत अधिग्रहित किया जा सकेगा।

–आईएएनएस

एसएनपी/डीएससी

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