Digital India : डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने के साथ ही देश की शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा डिजिटल बदलाव देखने को मिला है। केंद्र सरकार ने बताया कि एक जुलाई 2026 तक 110.65 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं, जिससे छात्रों के लिए स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच स्थानांतरण, प्रवेश, छात्रवृत्ति और रोजगार के लिए शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी हो गया है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) को मजबूत किया है। नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप विकसित अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी), अपार (APAAR) और नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) जैसी पहलें छात्रों को आजीवन डिजिटल शैक्षणिक पहचान और सुरक्षित अकादमिक रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही हैं।
शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के तहत संचालित अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) छात्रों द्वारा विभिन्न मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों से अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने, स्थानांतरित करने और उपयोग करने की सुविधा प्रदान करता है। यह व्यवस्था मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (MEME), क्रेडिट ट्रांसफर और लचीली शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देती है।
एबीसी को अपार (Automated Permanent Academic Account Registry) से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान मिलती है। इसके जरिए स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और अन्य मान्यता प्राप्त शिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहते हैं। सरकार के मुताबिक अब तक 2,963 उच्च शिक्षण संस्थान एबीसी प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। देशभर में 26.29 करोड़ से अधिक अपार आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 110.65 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड किए जा चुके हैं।
दस्तावेजों का सत्यापन हुआ आसान और पारदर्शी
एबीसी और एनएडी के माध्यम से छात्रों को अब बार-बार कागजी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए प्रवेश, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और रोजगार के लिए शैक्षणिक योग्यता का सत्यापन तेजी से हो जाता है। इससे न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि फर्जी प्रमाणपत्रों की संभावना भी काफी कम हो गई है।
एनएडी बना डिजिटल प्रमाणपत्रों का सुरक्षित भंडार
नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां शैक्षणिक संस्थान डिग्री, डिप्लोमा, अंकपत्र और अन्य प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में जारी और सुरक्षित रखते हैं। छात्र किसी भी समय अपने प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं, जबकि शिक्षण संस्थान, नियोक्ता और सरकारी एजेंसियां ऑनलाइन सत्यापन कर सकती हैं। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक खर्च घटा है, कागजी कार्यवाही कम हुई है और दस्तावेज खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या भी समाप्त हुई है।
छात्रों को मिल रहे कई बड़े लाभ
सरकार के अनुसार एबीसी, अपार और एनएडी के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से छात्रों को सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड, कहीं से भी शैक्षणिक दस्तावेजों तक पहुंच, आसान क्रेडिट ट्रांसफर, मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट की सुविधा, छात्रवृत्ति एवं रोजगार के लिए तेज सत्यापन, कम कागजी प्रक्रिया तथा डिजीलॉकर सहित अन्य डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्म से निर्बाध एकीकरण का लाभ मिल रहा है।
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