Dr Subhash Kashyap Death : आज संविधान के बड़े ज्ञाता व विशेषज्ञ व पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है. वे 97 साल की उम्रे के थे. उन्होंने अपने आवास पर आखिरी सांस ली. जानकारी के मुताबिक, सुभाष कश्यप की मौत कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट की वजह से हुई है.
Dr Subhash Kashyap Passed Away : कौन थे डा सुभाष कश्यप
वे देश के प्रखत संविधान विशेषज्ञ ( Constitutional Expert ), कानूनविद और पूर्व लोकसभा के रूप में जाने जाते थे। 10 मई 1929 को जन्मे डॉ. कश्यप 97 वर्ष के थे। भारतीय संसदीय प्रणाली के सबसे प्रामाणिक विद्वानों में शुमार डॉ. कश्यप ने चार दशकों से भी अधिक समय तक देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में अद्वितीय योगदान दिया। उनके निधन से भारतीय संसदीय इतिहास का एक महान युग समाप्त हो गया है।
डॉ. कश्यप का भारतीय संसद से जुड़ाव साल 1953 में शुरू हुआ था। वे साल 1984 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने देश की सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा की कार्यवाही और जटिल संसदीय प्रक्रियाओं के संचालन में बेहद निर्णायक भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन और विधिक क्षेत्र में उनके इसी ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा था।
Padma Bhushan Dr Subhash Kashyap : संविधान के जानकार
डा. सुभाष कश्यप केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं थे, बल्कि संविधान के एक बड़े शिक्षक और लेखक भी थे। उन्होंने भारतीय संविधान और संसदीय प्रक्रियाओं पर 100 से ज्यादा किताबें और 500 से अधिक शोध पत्र लिखे, जो आज भी विधिक बिरादरी के लिए गाइड बुक की तरह काम करते हैं। वे लंबे समय तक ‘भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन’ (INBA) के अध्यक्ष भी रहे।
उम्र के आखिरी पड़ाव में भी वे देश की नीतियों को तय करने में मदद करते रहे। वे नई दिल्ली के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (CPR) में मानद रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर जुड़े हुए थे। (बता दें कि विधिक मामलों की चर्चा करने वाले CPR के आधिकारिक एक्स हैंडल को करीब 1 लाख 15 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं, जहां उनके कार्यों पर शोक व्यक्त किया जा रहा है)। डॉ. कश्यप ‘संविधान समीक्षा राष्ट्रीय आयोग’ के सदस्य और उसकी ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा, हाल के वर्षों में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की संभावनाओं को तलाशने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति में भी वे एक प्रमुख सदस्य थे। उनका विधिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।


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