वॉशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। इजरायल और लेबनान ने वॉशिंगटन में दो दिनों तक चली अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत के बाद युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने आगे भी सीधे बातचीत जारी रखने और सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने का वादा किया है, ताकि दक्षिणी लेबनान में किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की वापसी रोकी जा सके।
यह समझौता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश विभाग में हुई अमेरिका, इजरायल और लेबनान की चौथी उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक के बाद सामने आया।
इस फैसले की घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डैन हॉलर ने कहा, “अमेरिका के नेतृत्व में हुई बातचीत के नतीजे के तौर पर इजरायल और लेबनान ने युद्धविराम लागू करने पर सहमति दी है।”
तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह युद्धविराम इस शर्त पर लागू होगा कि “हिज्बुल्लाह की ओर से पूरी तरह से गोलीबारी बंद हो और उसके सभी लड़ाके दक्षिण लिटानी क्षेत्र से हट जाएं।”
यह भी तय हुआ है कि जल्द ही कुछ ‘पायलट जोन’ बनाए जाएंगे, जहां लेबनान की सेना पूरी तरह नियंत्रण संभालेगी।
डैन हॉलर ने कहा, “दोनों पक्षों ने अमेरिका के मार्गदर्शन में इस बात पर सहमति दी है कि ऐसे पायलट जोन जल्दी बनाए जाएंगे, जहां लेबनानी सेना पूरी तरह नियंत्रण रखेगी और किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं होगी।”
बयान में कहा गया कि ये कदम आगे चलकर दोनों देशों के बीच ‘एक व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते’ की स्थिति बनाने में मदद करेंगे।
तीनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और लेबनान के भविष्य के रिश्ते उनकी अपनी सरकारों की ओर से तय किए जाने चाहिए, किसी बाहरी ताकत की ओर से नहीं।
डैन हॉलर ने कहा कि सभी देशों ने इस बात की पुष्टि की कि इजरायल और लेबनान के भविष्य के संबंध दोनों संप्रभु सरकारों की ओर से तय किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश या गैर-सरकारी ताकत को लेबनान के भविष्य को बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इजरायल और लेबनान ने अपने बयान में कहा कि उनके बीच ‘कोई शत्रुता का इरादा नहीं है’ और उन्होंने सीधे बातचीत जारी रखने का वादा किया है, ताकि भरोसा बढ़ाया जा सके, पुराने विवाद सुलझाए जा सकें और एक बड़े समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
प्रतिनिधियों ने एक सुरक्षा ढांचे पर भी चर्चा की, जो 29 मई को पेंटागन में हुई बातचीत पर आधारित है। इसका मकसद दोनों देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करना है। इसमें ‘गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को खत्म करना और उनकी वापसी रोकना’ भी शामिल है।
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित रहा।
वॉशिंगटन ने लेबनान की सेना को समर्थन जारी रखने का भी वादा किया, ताकि वह पूरे देश में अपना नियंत्रण मजबूत कर सके। डैन हॉलर ने कहा कि अमेरिका ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दो जून वाले बयान को भी दोहराया, जिसमें कहा गया था कि ‘हिज्बुल्लाह सिर्फ इजरायल का नहीं, बल्कि अमेरिका और लेबनान का भी दुश्मन है।’
इजरायल ने दोहराया कि उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब ‘हिज्बुल्लाह का हथियार खत्म किया जाए और उसके पूरे ढांचे को लेबनान में पूरी तरह खत्म किया जाए।’
वहीं लेबनान ने कहा कि वह ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के आपसी सम्मान’ को जरूरी मानता है और ‘क्षेत्रीय अखंडता और पूरी तरह से संप्रभुता’ के सिद्धांतों पर जोर देता है। बेरूत ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के सहयोग से अपनी सेना की क्षमता बढ़ाएगा, ताकि पूरे देश में प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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