कुर्क की गई संपत्तियां उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने निहारिका वेंचर्स एंड डेवलपर्स नामक फर्म से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 2.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, एजेंसी ने शनिवार को यह जानकारी दी। कुर्क की गई संपत्तियां उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित पांच आवासीय फ्लैटों के रूप में हैं। एजेंसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ईडी, लखनऊ ने 13/12/2024 को 2.73 करोड़ रुपये (लगभग) की अचल संपत्ति को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जो प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में स्थित पांच आवासीय फ्लैटों के रूप में ओम प्रकाश द्विवेदी, अभिषेक द्विवेदी, श्रीमती निहारिका द्विवेदी और श्रीमती राधा रानी के नाम पर मेसर्स निहारिका वेंचर्स एंड डेवलपर्स के मामले में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत पंजीकृत है।
पूर्व प्रमोटरों ने बैंकों से धोखाधड़ी की है और निजी निवेश के लिए फंड डायवर्ट किया है
इससे पहले आज एक अन्य कार्रवाई में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4,025 करोड़ रुपये की संपत्ति जेएसडब्ल्यू को वापस कर दी, जो दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत पूर्ववर्ती भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड की संपत्तियों के लिए एक सफल समाधान आवेदक था। संपत्तियों को शुरू में ईडी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 5 के तहत अनंतिम रूप से कुर्क किया गया था। जांच में यह बात सामने आने के बाद कि भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के पूर्व प्रमोटरों ने बैंकों से धोखाधड़ी की है और निजी निवेश के लिए फंड डायवर्ट किया है, कुर्की की गई। इस साल 11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के साथ पीएमएलए की धारा 8(8) (मुकदमा लंबित रहने तक पुनर्स्थापन) के दूसरे प्रावधान के तहत पीएमएलए संपत्ति बहाली नियमों के नियम 3ए के साथ पुनर्स्थापन किया गया।
सीआईआरपी के दौरान जांच के तहत कॉरपोरेट देनदारों की संपत्ति कुर्क करने की ईडी की शक्तियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को खुला रखा है। इसके अलावा, आईबीसी की धारा 32ए के लाभ के लिए पीएमएलए जांच के तहत कॉरपोरेट देनदारों की पात्रता को सत्यापित करने की ईडी की शक्तियों को भी सुप्रीम कोर्ट ने खुला रखा है।


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