बीएलओ की लापरवाही के खिलाफ चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया

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Election Commission: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि बीएलओ द्वारा कर्तव्य में लापरवाही, उपेक्षा, कदाचार या आयोग के निर्देशों की अवहेलना पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जाए। यह कदम मतदाता सूची की सटीकता, अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। Election Commission: बीएलओ की लापरवाही पर चुनाव आयोग का सख्त निर्देश आयोग के 4 अक्टूबर 2022 के निर्देश का हवाला देते हुए…

Election Commission: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि बीएलओ द्वारा कर्तव्य में लापरवाही, उपेक्षा, कदाचार या आयोग के निर्देशों की अवहेलना पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जाए। यह कदम मतदाता सूची की सटीकता, अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

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Election Commission: बीएलओ की लापरवाही पर चुनाव आयोग का सख्त निर्देश

आयोग के 4 अक्टूबर 2022 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि बीएलओ की नियुक्ति लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13बी(2) के तहत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) की मंजूरी से की जाती है। धारा 13सीसी के तहत बीएलओ को आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाता है, जिससे वे आयोग के अधीन आते हैं।

आयोग ने बीएलओ द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों में लापरवाही, जानबूझकर निर्देशों का पालन न करना, आरपी अधिनियम 1950 या निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 के उल्लंघन, या कोई ऐसा कार्य/चूक जो मतदाता सूची पर प्रतिकूल प्रभाव डाले, के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की कई प्रक्रियाएं हैं।

डीईओ/ईआरओ के रिपोर्ट के आधार पर एक्शन

इनमें डीईओ बीएलओ को तुरंत निलंबित करेगा और संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी (जैसे विभागीय अधिकारी) को विभागीय जांच शुरू करने की सिफारिश करेगा। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ऐसी सिफारिश पर तुरंत कार्रवाई करेगा और छह महीने के भीतर कार्रवाई की सूचना देगा। यदि मामला आपराधिक कदाचार का है, तो डीईओ सीईओ की मंजूरी से आरपी अधिनियम की धारा 32 के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज करवा सकता है।

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सीईओ स्वतः संज्ञान ले सकते हैं या डीईओ/ईआरओ की रिपोर्ट पर बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं, जैसे निलंबन, विभागीय जांच या एफआईआर। अनुशासनात्मक कार्यवाही का नतीजा सीईओ की पूर्व सहमति के बिना प्रभावित नहीं होगा। सभी कार्रवाइयों की सूचना आयोग को भी दी जाएगी।

Election Commission: बीएलओ की अहम भूमिका

यह निर्देश मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), सामान्य पुनरीक्षण और अन्य चुनावी तैयारियों के दौरान बीएलओ की जवाबदेही बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। बीएलओ मतदाता सूची तैयार करने, घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने, दावे-आपत्तियां दर्ज करने और मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। लापरवाही से गलत नाम जुड़ना या वैध मतदाता हटना जैसी समस्याएं चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं।

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Rahul Kumar Rawat