यूपी के पूर्व राज्यपाल बोले, सपा नेता आजम खान अपने पाप की सजा भुगत रहे

यूपी के पूर्व राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता राम नाईक मंगलवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान पर निशाना साधा और कहा कि अपने बेटे की जन्मतिथि बदलवाने का पाप उन्होंने किया है। जिसकी सजा वह भुगत रहे हैं।

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राम नाईक भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था बहुत बेहतर है। रामपुर में मौलाना मो. जौहर ट्रस्ट को माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा लीज पर दी गई मुर्तजा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के भवन व भूमि सरकार के वापस लेने वाले मामले में पूर्व राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के फैसले की सराहना की और कहा कि आजम खान द्वारा गलत तरीके से इस ट्रस्ट की जमीन को लिया गया था, जिसके लिए वार्षिक महज 100 रुपए किराए दिया जाता था। लेकिन, योगी सरकार द्वारा पिछले कैबिनेट में जौहर ट्रस्ट की जमीन वापस लेने का जो फैसला लिया गया है, वह काफी सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि आजम खान को जो सजा मिल रही है, वह उनको स्वीकार करना चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है। जिसने गलत किया है, उसको सजा मिलनी चाहिए। नाईक से यह पूछे जाने पर कि सरकार के इस कदम को लेकर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा है कि सरकार ऐसा कदम उठाकर गलत परम्परा की शुरुआत कर रही है, इस पर उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे हटाने में कुछ गलत नहीं है। गलत को सही करना गलत परम्परा की शुरुआत कैसे हो सकती है।

राम नाईक ने कहा कि पहले भारत की संसद में वंदे मातरम गीत नहीं गाया जाता था। मेरे प्रयासों से राज्यसभा व लोकसभा में वंदे मातरम का गायन शुरू हुआ। यह गीत आज ही के दिन 7 नवंबर 1875 को लिखा गया था, इसलिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यूपी के बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था भी मेरे प्रयासों से लागू हुई है। इससे कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है और मेरे कहने पर ही 24 जनवरी को यूपी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। प्रदेश ने 2017 के बाद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बड़ी छलांग लगाई है। यूपी 17वें से दूसरे स्थान पर आ गया है। प्रदेश में विकास को गति मिली है। पूर्व राज्यपाल ने कहा कि 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। 24 जनवरी को यूपी दिवस मनाया जाएगा और 26 जनवरी को गणतंत्र की स्थापना के 75 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने राजभवन की मौजूदा व्यवस्था पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

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