गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ: विसर्जन से पहले करें ये जरूरी पूजा और विदाई रस्में

Summary :

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। विशेष बात यह है कि गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। ऐसे में गणेश उत्सव के बाद बप्पा को विदाई देने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अनंत चतुर्दशी का खास महत्व है। अनंत चतुर्दशी पर गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव समापन भी होता है। घरों और पंडालों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। गणेश विसर्जन से पहले…

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। विशेष बात यह है कि गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। ऐसे में गणेश उत्सव के बाद बप्पा को विदाई देने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अनंत चतुर्दशी का खास महत्व है।

अनंत चतुर्दशी पर गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव समापन भी होता है। घरों और पंडालों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा, भोग और आरती करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक और सही विधि से भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन करने से घर-परिवार में सकारात्मक माहौल के साथ-साथ सुख-समृद्धि बनी रहती है।

मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले विदाई पूजा में परिवार के सदस्य भगवान गणेश की मूर्ति के पास इकट्ठा होते हैं। विदाई पूजा में फूल, दूर्वा, फल और नैवेद्य चढ़ाते हैं। साथ ही, आरती की जाती है और भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार विदाई पूजा की जा सकती है।

मूर्ति को पूजा की जगह से हटाने से पहले ‘उत्तर पूजा’ या विदाई की अपनी पारंपरिक रस्म भी निभा सकते हैं। जरूरी बात यह है कि विसर्जन वाली जगह के लिए निकलने से पहले घर की पारंपरिक विदाई रस्में पूरी कर ली जाएं।

आखिरी भेंट के लिए एक अलग थाली तैयार की जा सकती है। पूजा का जरूरी सामान अलग-अलग ले जाने के बजाय एक साथ रखा जा सकता है।

मूर्ति को आखिरी विदाई के लिए फूलों और साधारण सजावट के साथ तैयार किया जाता है। लोग बप्पा को तय विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं। इस दौरान वे भक्ति गीत गाते हैं और जयकारा लगाते हैं।

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों, भक्ति भजनों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ जयघोष के साथ भगवान गणेश को विदा करते हैं, इस विश्वास के साथ कि वे अगले वर्ष फिर आएंगे।

घर पर होने वाले उत्सव के लिए किसी उपयुक्त बर्तन, कृत्रिम तालाब या तय टैंक में विसर्जन किया जा सकता है। लोगों को मूर्तियों को स्थानीय व्यवस्था के अनुसार तय विसर्जन स्थलों पर ले जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एएस/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.