मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Gas Pipeline Oman to Gujarat परियोजना को फिर से गति मिली है, जिससे भारत को प्राकृतिक गैस की स्थिर और सुरक्षित आपूर्ति मिल सकती है। यह महत्वाकांक्षी योजना ओमान और गुजरात को समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली पाइपलाइन के जरिए सीधे जोड़ने का लक्ष्य रखती है।
क्या है परियोजना?
प्रस्तावित Oman India Gas Pipeline योजना अरब सागर के नीचे लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन होगी। यह पाइपलाइन ओमान से प्राकृतिक गैस सीधे भारत के गुजरात तट तक पहुंचाएगी। लंबे समय से चर्चा में रही इस परियोजना को पहले लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सका था, लेकिन अब नए तकनीकी अध्ययन और समुद्री सर्वेक्षण के बाद इसे फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है।
परियोजना पर कितना आएगा खर्च?

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। समुद्र की अत्यधिक गहराई और जटिल इंजीनियरिंग के कारण इसकी लागत काफी अधिक मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में यह निवेश भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
India Energy Supply के लिए क्यों अहम है यह पाइपलाइन?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर है। ऐसे में भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
वर्तमान में खाड़ी देशों से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री जहाजों के जरिए भारत पहुंचता है। किसी भी भू-राजनीतिक संकट या समुद्री मार्ग में रुकावट का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह पाइपलाइन भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Strait of Hormuz पर निर्भरता होगी कम
भारत को खाड़ी देशों से मिलने वाली अधिकांश ऊर्जा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होकर आती है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या आवाजाही प्रभावित होती है, तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस पाइप्लाइन के शुरू होने के बाद भारत की इस समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी।
कितनी गहराई में बिछेगी पाइपलाइन?
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती इसकी गहराई है। प्रस्तावित मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से भी अधिक नीचे होगा। इतनी गहराई पर पाइपलाइन बिछाना तकनीकी रूप से बेहद जटिल माना जाता है। इसलिए इस परियोजना में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
गैस परिवहन की लागत कितनी होगी?
परियोजना से जुड़े शुरुआती अनुमानों के अनुसार, पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस पहुंचाने की लागत लगभग 2 से 2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो सकती है। अंतिम लागत परियोजना के निर्माण खर्च, वित्तीय व्यवस्था और भविष्य की गैस कीमतों पर निर्भर करेगी।
West Asia Crisis के बीच नई उम्मीद
West Asia Crisis के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में यह पाइप्लाइन भारत को ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित रास्ता प्रदान कर सकती है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा तथा देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को नया आधार मिलेगा।
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