गुजरात दौरे पर पहुंची जेपीसी ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर जारी रखी चर्चा

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गांधीनगर, 20 मई (आईएएनएस)। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव की व्यावहारिकता की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने बुधवार को गुजरात का अपना तीन दिवसीय दौरा जारी रखा। दौरे के दूसरे दिन, समिति ने प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, मौजूदा विधायकों और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। 39 सदस्यों वाली इस समिति में लोकसभा के 27 सांसद और राज्यसभा के 12 सांसद शामिल हैं। इसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं। इस समिति को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं की जांच करने…

गांधीनगर, 20 मई (आईएएनएस)। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव की व्यावहारिकता की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने बुधवार को गुजरात का अपना तीन दिवसीय दौरा जारी रखा। दौरे के दूसरे दिन, समिति ने प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, मौजूदा विधायकों और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

39 सदस्यों वाली इस समिति में लोकसभा के 27 सांसद और राज्यसभा के 12 सांसद शामिल हैं। इसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं। इस समिति को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं की जांच करने का काम सौंपा गया है।

यह समिति प्रस्तावित संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की बारीकी से जांच कर रही है। दौरे के पहले दिन, समिति ने गांधीनगर के जीआईएफटी सिटी में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस दौरान राज्य सरकार ने शासन संरचनाओं और चुनावी तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

बैठक की रिपोर्ट के अनुसार, जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने इस प्रस्तुति को एक आदर्श प्रस्तुति बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब समिति के सामने इतनी व्यापक और एकीकृत जानकारी पेश की गई है। उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रस्तुति में जिन कई पहलुओं पर प्रकाश डाला गया था, उन्हें पहले समिति के सामने इतनी विस्तार से कभी पेश नहीं किया गया था। चौधरी ने आगे संकेत दिया कि प्रस्तुति के गुजरात मॉडल को और बेहतर बनाया जाएगा और इसी तरह की अन्य प्रस्तुतियों के लिए एक नमूने के तौर पर दूसरे राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।

उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि समिति की चर्चाओं का उद्देश्य संसद के लिए प्रस्ताव पर अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले राज्यों, राजनीतिक हितधारकों और विभिन्न संस्थाओं से व्यवस्थित सुझाव प्राप्त करना है।

उन्होंने कहा था कि अर्थशास्त्रियों ने भी कहा है कि इससे जीडीपी में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यदि चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो देश सात लाख करोड़ रुपये बचा सकता है। उस पैसे का उपयोग बुनियादी ढांचे, गरीबों के कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जन कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है।

दूसरे दिन, समिति ने चर्चा के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया। इन चर्चाओं में भाजपा, कांग्रेस, और आप के नेताओं के साथ-साथ राज्य के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।

आप के प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, विधायक गोपाल इटालिया और चैतर वसावा के साथ-साथ पार्टी के अन्य प्रतिनिधि भी शामिल थे।कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने किया, जिसमें विधायक इमरान खेड़ावाला और अन्य नेता शामिल थे। सत्ताधारी भाजपा का प्रतिनिधित्व भी वरिष्ठ पदाधिकारियों और विधायकों ने किया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, और कई कैबिनेट मंत्री तथा विधायक भी संसदीय पैनल के साथ होने वाली इन चर्चाओं में हिस्सा ले रहे हैं।

पार्टी प्रतिनिधियों के अनुसार, इस सत्र ने राजनीतिक हितधारकों को अपनी बात सीधे समिति के सामने रखने का अवसर प्रदान किया। भाजपा नेताओं ने इस प्रस्ताव के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, जबकि विपक्षी दलों ने संवैधानिक ढांचे, संघीय सिद्धांतों और चुनावी निष्पक्षता से संबंधित चिंताएं उठाईं।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है, जिसका लक्ष्य चुनावी खर्च और प्रशासनिक व्यवधान को कम करना है। भारत में आखिरी बार 1967 में एक साथ चुनाव हुए थे, इसके बाद के वर्षों में कई विधानसभाओं और लोकसभा के समय से पहले भंग हो जाने के कारण यह क्रम टूट गया था।

यह प्रस्ताव वर्तमान में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद गहन जांच के दौर से गुजर रहा है। इस समिति ने व्यापक विचार-विमर्श और शोध के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।

पैनल ने एक साथ चुनाव कराने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण का सुझाव दिया है। इसमें चुनावी चक्रों का तालमेल बिठाना और मध्यावधि में विधानसभा भंग होने की स्थिति से निपटने के प्रावधान शामिल हैं। यदि संवैधानिक बदलाव पूरे हो जाते हैं, तो इसे 2029 से लागू किया जा सकता है।

जेपीसी से उम्मीद की जा रही है कि वह गुजरात दौरे के शेष दिनों में भी हितधारकों के साथ अपना विचार-विमर्श जारी रखेगी, जिसके बाद वह अपनी संसदीय रिपोर्ट के लिए प्राप्त सुझावों को संकलित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम

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