Gurmeet Ram Rahim Parole News: रेप और हत्या के मामले में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आएगा। शनिवार को राम रहीम की 40 दिन की पैरोल मंजूर हुई है। पैरोल अवधि के दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में ही रहेगा। गौरतलब है कि वह दो साध्वियों के रेप और पत्रकार छत्रपति हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।
40 Day Parole: पैरोल पर उठ रहे सवाल
गुरमीत राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल और फरलो को लेकर जनता के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है। पिछली बार 15 सितंबर को उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी। इस बार 40 दिन की पैरोल मिलने के बाद राम रहीम जेल से बाहर आएगा। इस बार भी प्रशासन ने साफ किया है कि पैरोल अवधि के दौरान उसका ठिकाना सिरसा डेरा ही रहेगा। लेकिन लोगों का कहना है कि आखिर राम रहीम पर इतनी मेहरबानी क्यों की जा रही है जबकि वह रेप और हत्या के मामले में जेल में हैं?
Dera Sacha Sauda Chief: किन आरोपों में सजा काट रहा है राम रहीम?

राम रहीम को CBI कोर्ट ने दो साध्वियों से दुष्कर्म के आरोप में दस-दस साल की सजा सुनाई थी, यानी कुल 20 साल की सजा। इसके बाद, CBI कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उसे दोषी ठहराया और सजा दी। साथ ही, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी राम रहीम को सजा मिली। फिलहाल, वह इन सभी मामलों में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है।
Rape Case Conviction: पैरोल पर सरकार का तर्क
राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो पर सवाल उठते रहे हैं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि राम रहीम एक आम कैदी नहीं, बल्कि एक खतरनाक क्रिमिनल है। हालांकि, हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में दिए हलफनामे में इसे नकारते हुए कहा कि राम रहीम जेल में अच्छा व्यवहार करने वाला कैदी है। सरकार का तर्क है कि जेल नियमों के मुताबिक, एक कैदी को साल में 90 दिन तक की पैरोल मिल सकती है।
What Is Parole: पैरोल क्या है?

पैरोल एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें जेल में बंद कैदी को कुछ शर्तों के तहत अस्थायी रूप से जेल से रिहा किया जाता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि कैदी अपने परिवार और समाज से जुड़ा रहे और सजा के बाद समाज में फिर से घुल-मिल सके। लेकिन, इस दौरान उसे पैरोल अधिकारियों की निगरानी में रहना पड़ता है और किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर उसे फिर से जेल भेजा जा सकता है। यह व्यवस्था कैदी को जेल के कठोर माहौल से बचाने के साथ-साथ उसे समाज से कटने से भी रोकती है, ताकि वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभा सके।


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