अमरावती, 18 मार्च (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश सरकार ने बुधवार को दिव्यांगजनों के लिए मुफ्त बस यात्रा की ‘दिव्यांग शक्ति’ योजना शुरू की, जिससे राज्य उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां यह सुविधा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस योजना का शुभारंभ करते हुए इसे समावेशी और समान समाज की दिशा में बड़ा कदम बताया। महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना की सफलता के बाद अब इस सुविधा का विस्तार दिव्यांगजनों तक किया गया है।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और आईटी एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के साथ योजना का शुभारंभ करने के बाद मुख्यमंत्री ने मंगलगिरि से पेनुमाका तक लाभार्थियों के साथ विशेष बस यात्रा भी की, जिसे रास्ते में लोगों का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला।
इस दौरान मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने दिव्यांगजनों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और सरकारी योजनाओं पर फीडबैक लिया।
सरकारी बयान के अनुसार, इस संवाद से लाभार्थियों को होने वाली आवागमन संबंधी दिक्कतों की प्रत्यक्ष जानकारी मिली, जिससे सुलभ सार्वजनिक परिवहन की जरूरत और मजबूत हुई। नेताओं ने सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और समान अवसर सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 21 महीनों में गठबंधन सरकार ने जनकल्याण के लिए कई पहल की हैं और ‘दिव्यांग शक्ति’ योजना की शुरुआत से उन्हें विशेष संतोष मिला है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन असाधारण प्रतिभा वाले लोग हैं, जो चुनौतियों को पार कर सफलता हासिल करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने ‘चेयुथा’ कार्यक्रम के तहत दी गई सहायता का भी उल्लेख किया, जिसमें ट्राइसाइकिल के साथ दोपहिया वाहन भी वितरित किए गए थे।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार दिव्यांगजनों को 6,000 रुपये की पेंशन देने वाली एकमात्र सरकार है, जिसे पहले 500 रुपये से बढ़ाया गया है।
यात्रा के बाद मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों के लिए विशेष दोपहर भोज का भी आयोजन किया, जिसमें उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश भी शामिल हुए।
‘दिव्यांग शक्ति’ योजना के तहत एपीएसआरटीसी की सिटी ऑर्डिनरी, मेट्रो एक्सप्रेस, पल्ले वेलुगु, अल्ट्रा पल्ले वेलुगु और एक्सप्रेस बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।
यह योजना 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले 21 श्रेणियों के लोगों पर लागू होगी और इससे लगभग 12.76 लाख लोगों (सहायकों सहित) को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रति वर्ष 207 करोड़ रुपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है।
–आईएएनएस
डीएससी
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