बेंगलुरु, 8 अगस्त (आईएएनएस)। बेंगलुरु पुलिस ने शनिवार को ‘ऑपरेशन मुक्ता’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसका मकसद शहर के अलग-अलग हिस्सों में कथित तौर पर रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उनका पता लगाना है। इसके तहत कई इलाकों में छापेमारी और वेरिफिकेशन का काम किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत, पुलिस टीमों ने व्हाइटफ़ील्ड, कडुगोडी, महादेवपुरा और अन्य इलाकों में तलाशी ली और दस्तावेजों की जांच की। ये तीनों इलाके बेंगलुरु के प्रमुख टेक्नोलॉजी कॉरिडोर का हिस्सा हैं और यहां कई मल्टीनेशनल आईटी और बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूद हैं।
व्हाइटफ़ील्ड डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) सिदुल्ला अदावत ने बताया कि बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरे शहर में यह स्पेशल ड्राइव शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा, “बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर के आदेशों के अनुसार, व्हाइटफील्ड डीसीपी डिवीजन समेत पूरे शहर में एक स्पेशल ड्राइव चलाई जा रही है। इस अभियान में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल हैं। यह अभियान जारी रहेगा।”
डीसीपी के अनुसार, पुलिस टीमों ने कई संदिग्ध अवैध प्रवासियों का पता लगा लिया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कुछ लोगों को उनके संबंधित देशों में वापस भेज दिया गया है।
अदावत ने कहा, “व्हाइटफील्ड डिवीजन में अलग-अलग पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली 30 से ज़्यादा जगहों पर जांच की जा रही है। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति मिलता है, तो हम उसके दस्तावेजों की जांच करेंगे। अगर हमें किसी दूसरे देश का पहचान पत्र या कोई ऐसा सुराग मिलता है, जिससे पता चले कि वे बिना इजाजत के यहां रह रहे विदेशी नागरिक हैं, तो मामले की जानकारी ‘फ़ॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िस’ (एफआरआरओ) को दी जाएगी।”
उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारियों से देश से निकालने के आदेश मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी और अवैध प्रवासियों को उनके संबंधित देशों में वापस भेज दिया जाएगा।
इस अभियान के तहत, पुलिस उन लोगों की पहचान और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है, जिनके बारे में शक है कि वे बिना वैध अनुमति के शहर में रह रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि खास तौर पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
पुलिस संदिग्ध लोगों के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की भी जांच कर रही है, क्योंकि अधिकारियों को शक है कि कुछ विदेशी नागरिकों ने स्थानीय मददगारों की मदद से भारतीय पहचान-पत्र हासिल कर लिए होंगे।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चल रही इस प्रक्रिया के दौरान 50 से ज़्यादा लोगों का पता लगाया गया है, जबकि चार बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर ली गई है। जिनके पास सही दस्तावेज़ नहीं हैं, उनकी और जांच-पड़ताल की जा रही है।
पुलिस ने प्रवासी मजदूरों को किराए पर दिए गए अस्थायी शेड और रहने की दूसरी अस्थायी जगहों पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है।
डीसीपी अदावत ने बताया कि कुछ स्थानीय निवासी कथित तौर पर शेड बनाते हैं और उन्हें दूसरे राज्यों और जिलों से बेंगलुरु आए निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को किराए पर देते हैं। पुलिस को शक है कि प्रवासी मजदूरों के साथ-साथ कुछ गैर-कानूनी विदेशी नागरिक भी ऐसी जगहों पर रह रहे हो सकते हैं।
डीसीपी ने कहा, “हम ऐसे अनधिकृत प्रवास में मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेंगे।”
पुलिस ने कहा कि पूरे शहर में वेरिफिकेशन अभियान जारी रहेगा और इस दौरान इकट्ठा किए गए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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