बेंगलुरु, 14 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में कांग्रेस ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी पर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि यह हिंसा राजनीतिक रूप से प्रेरित थी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की छवि खराब करने के लिए कराई गई। पार्टी ने कुमारस्वामी पर पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर दोहरा रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एचसी बालकृष्ण ने कुमारस्वामी पर विरोध प्रदर्शनों को प्रायोजित करने का आरोप लगाया, जबकि ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा कि केंद्रीय मंत्री पर्यावरण के मुद्दे पर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग रुख अपना रहे हैं।
इस बीच, बिदादी टाउनशिप परियोजना के विरोध में प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। कुछ किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी दोबारा भूमि सर्वेक्षण के लिए आए तो वे जहर खा लेंगे। वहीं, दूसरी ओर कुछ किसानों ने परियोजना को जल्द लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
मीडिया से बातचीत में विधायक एचसी बालकृष्ण ने आरोप लगाया कि सोमवार को मंडलहल्ली गांव में हुई हिंसा के पीछे सीधे तौर पर कुमारस्वामी का हाथ है।
उन्होंने कहा, “कुमारस्वामी बसों का इंतजाम कर अपने कार्यकर्ताओं को वहां भेज रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें केंद्र में कोई विशेष काम नहीं सौंपा है। केंद्रीय मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने के बजाय वे बिदादी में किसानों को भड़का रहे हैं। शायद कर्नाटक में भाजपा की स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें यहां भेजा गया है।”
बालकृष्ण ने यह भी दावा किया कि बिदादी टाउनशिप परियोजना की परिकल्पना खुद कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री रहते हुए की थी।
उन्होंने कहा, “हम कुमारस्वामी के ड्रीम प्रोजेक्ट को ही लागू कर रहे हैं। आज वे केवल राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं। बिदादी में जो कुछ भी हो रहा है, वह कुमारस्वामी प्रायोजित एक राजनीतिक नाटक है। इसका उद्देश्य संकट पैदा करना और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की छवि खराब करना है।”
सरकार का बचाव करते हुए बालकृष्ण ने कहा कि अधिकारी किसानों पर जबरन संयुक्त माप सर्वेक्षण (जॉइंट मेजरमेंट सर्वे) नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “सर्वे केवल उन क्षेत्रों में किया जा रहा है, जहां किसानों ने सहमति पत्र दिए हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना की अंतिम अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है और इसे वापस लेने की संभावना बहुत कम है। सर्वेक्षण के बिना किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिल सकता।”
प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों पर हमला होने पर मामला दर्ज होना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा, “यदि सरकारी अधिकारियों पर हमला किया जाएगा तो किसी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी। मेरे खिलाफ भी विधायक रहते हुए एक सरकारी अधिकारी को डांटने पर मामला दर्ज हुआ था और मुझे आठ साल तक अदालत में लड़ाई लड़नी पड़ी थी।”
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने भी कुमारस्वामी पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “बिदादी में हुई हिंसा राजनीतिक रूप से प्रेरित है। इसके पीछे कौन है, यह सभी जानते हैं। कुमारस्वामी कहते हैं कि टाउनशिप परियोजना से पर्यावरण को नुकसान होगा, लेकिन एचएमटी वन भूमि के मामले में वह इसे केवल रियल एस्टेट के नजरिए से देखते हैं। इस दोहरे रवैये का जवाब उन्हें जनता को देना चाहिए।”
खंड्रे ने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहले ही कह चुके हैं कि बिदादी टाउनशिप परियोजना की शुरुआत कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री रहते हुई थी।
बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर क्षेत्र में मतभेद लगातार बने हुए हैं। कांग्रेस इसे लंबे समय से लंबित विकास परियोजना बता रही है, जबकि विपक्षी दल और कुछ किसान आरोप लगा रहे हैं कि सरकार किसानों की इच्छा के खिलाफ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है।
क्षेत्र में फिलहाल तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन किसानों के साथ बातचीत की तैयारी कर रहा है और कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच सर्वेक्षण दोबारा शुरू करने की योजना बना रहा है।
–आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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