चंडीगढ़, 4 नवंबर (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों द्वारा बार-बार की जा रही छापेमारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसकी एजेंसियां चाहे जितनी चाहें छापेमारी कर लें, लेकिन ‘आप’ सरकार को राज्य की जनता के लिए लगातार काम करने से कोई नहीं रोक सकता।
‘आप’ विधायक अमनदीप कौर के आवास पर हुई छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम मान ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है और असहमति को दबाने की कोशिश कर रही है। ‘आप’ नेताओं के खिलाफ उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा, क्योंकि वे ईमानदारी और लगन से लोगों की सेवा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डराने-धमकाने, राजनीतिक प्रतिशोध और साजिशों से न तो ‘आप’ कमजोर होगी और न ही पंजाब के विकास के एजेंडे पर कोई असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राजनीतिक हिसाब-किताब बराबर करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने के बजाय, लोगों की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए।
सीएम मान ने मीडिया से कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को डराने और अपनी नीतियों पर सवाल उठाने वालों की आवाज दबाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रही है। ये एजेंसियां अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर छापेमारी करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें ‘आप’ नेताओं के खिलाफ कुछ भी नहीं मिलेगा, जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं और पूरी लगन से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “इस तरह के हथकंडे न तो आम आदमी पार्टी को डरा सकते हैं और न ही पंजाब के लोगों की सेवा करने के हमारे संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। पंजाब की जनता ने हमें बदलाव और विकास के लिए जनादेश दिया है, और कोई भी राजनीतिक दबाव हमारे इस मिशन को पटरी से नहीं उतार सकता।”
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि राजनीतिक हिसाब-किताब बराबर करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने के बजाय, केंद्र सरकार को लोगों की चिंताओं को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक साजिशें और दबाव की रणनीतियां हमें पंजाब के लोगों से किए गए वादों को पूरा करने से नहीं रोक सकतीं।”
राजनीतिक रैलियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में सीएम मान ने कहा, “राहुल गांधी और अन्य सभी राजनीतिक नेता रैलियां आयोजित करने और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं। लोकतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति और राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी से मजबूत होता है, और हर किसी को ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार है।”
एक अन्य सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “सिर्फ विधायक बन जाना ही काफी नहीं है। चुने गए प्रतिनिधियों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहें, उसके सिद्धांतों का पालन करें और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से योगदान दें। चुनाव जीतने के साथ ही राजनीतिक जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।”
–आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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