जन्मदिन पर सीएम मोहन यादव का पर्यावरण संदेश, कछुओं को नदी में छोड़ेंगे

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भोपाल, 24 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत भाजपा नेता मोहन यादव 25 मार्च को 61 वर्ष के हो जाएंगे। वह अपने जन्‍मदिन के अवसर पर बामनेर नदी में एक दर्जन कछुए छोड़ेंगे। 25 मार्च, 1965 को उज्जैन में जन्मे मोहन यादव पेशे से वकील हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 2020 से 2023 तक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया था। नवंबर 2023 में उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से लगातार तीसरी जीत हासिल करने…

भोपाल, 24 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत भाजपा नेता मोहन यादव 25 मार्च को 61 वर्ष के हो जाएंगे। वह अपने जन्‍मदिन के अवसर पर बामनेर नदी में एक दर्जन कछुए छोड़ेंगे।

25 मार्च, 1965 को उज्जैन में जन्मे मोहन यादव पेशे से वकील हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं।

इससे पहले उन्होंने 2020 से 2023 तक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया था।

नवंबर 2023 में उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से लगातार तीसरी जीत हासिल करने के बाद, मोहन यादव ने 13 दिसंबर, 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्थान लिया है, जो वर्तमान में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।

इस अवसर पर, वह रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बामनेर नदी में एक दर्जन कछुए छोड़ेंगे। इसी के साथ ही, वह टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास में मदद के लिए एक ‘सॉफ्ट-रिलीज बोमा’ का शिलान्यास भी करेंगे।

सॉफ्ट-रिलीज बोमा का विकास राज्य सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) को पिछले तीन वर्षों में कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद चीतों के लिए तीसरा प्रमुख गंतव्य बनाया गया है।

कुछ महीने पहले कूनो नेशनल पार्क से कुछ चीतों को दूसरी जगह भेजने का फ़ैसला लिया गया था, और इसकी तैयारियां चल रही हैं। सरकार ने कहा कि कुनो से चीतों को बहुत जल्द नौरादेही लाया जाएगा।

रानी दुर्गावती बाघ अभ्यारण्य (नौरादेही) मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों के 72 गांवों को जोड़ता है।

यह मध्य प्रदेश का सातवां और भारत का 54वां बाघ अभ्यारण्य है, जिसे 2023 में बाघ अभ्यारण्य घोषित किया गया था। वर्तमान में, इस अभ्यारण्य में 32 बाघ हैं।

इस अभयारण्य को ‘भेड़ियों की धरती’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां भेड़ियों की आबादी सबसे ज़्यादा है। इस टाइगर रिज़र्व का इलाका चीतों के लिए एकदम सही है, जो दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले नजारों जैसा ही है।

यह अभयारण्य लगभग 240 पक्षी प्रजातियों का घर भी है, जो एक प्रमुख आकर्षण हैं। बाघ अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुए, भेड़िये, भालू, सियार, लकड़बग्घे, लोमड़ी, जंगली सूअर, नीलगाय, चार सींग वाला मृग (चौसिंगा), काला हिरण, चिंकारा, कछुए और मगरमच्छ सहित वन्यजीवों की एक विस्तृत विविधता पाई जा सकती है।

–आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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