भारत के लिए ‘सफेद सोना’ बन रहा कॉटन, ग्लोबल फाइबर उत्पादन में हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत रही

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नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। भारत कॉटन के रकबे के मामले में भारत दुनिया में पहले और उत्पादन व खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कॉटन उत्पादन 290.91 लाख गांठ रहा, जबकि इसी दौरान घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। यह जानकारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई। सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि इस क्षेत्र की ग्लोबल फाइबर उत्पादन में हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत की है। कॉटन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा हाल के वर्षों में उठाए गए कदम मुख्य रूप से…

नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। भारत कॉटन के रकबे के मामले में भारत दुनिया में पहले और उत्पादन व खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कॉटन उत्पादन 290.91 लाख गांठ रहा, जबकि इसी दौरान घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। यह जानकारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई।

सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि इस क्षेत्र की ग्लोबल फाइबर उत्पादन में हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत की है।

कॉटन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा हाल के वर्षों में उठाए गए कदम मुख्य रूप से उत्पादकता, गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच और मूल्य संवर्धन पर केंद्रित हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीद अभियान बाजार में कीमतों में गिरावट के दौरान किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करते हैं। वहीं, कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन का लक्ष्य वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन को बढ़ाकर 498 लाख गांठ (बेल) तक पहुंचाना है।

सरकार के अनुसार, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, डिजिटल खरीद प्रणाली और ट्रेसबिलिटी (उत्पाद की स्रोत तक पहचान) जैसी पहल भारतीय कॉटन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत कर रही हैं। इन प्रयासों से उत्पादकता बढ़ रही है, गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और वैश्विक कपास अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है।

भारत में आर्थिक महत्व के कारण कपास को ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है।

देशभर में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कॉटन की खेती होती है, जिससे करीब 60 लाख कपास किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसके अलावा, कॉटन प्रोसेसिंग, व्यापार और अन्य संबंधित गतिविधियों में लगे 4 से 5 करोड़ लोगों को भी इससे रोजगार मिलता है।

वस्त्र निर्माण के अलावा, कॉटन फाइबर, सूत, कपड़े और परिधानों के निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत वैश्विक कपास व्यापार में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अनुमानित 18 लाख गांठ (0.31 मिलियन मीट्रिक टन) कॉटन का निर्यात किया। यह वैश्विक कुल कॉटन निर्यात 541.69 लाख गांठ (9.21 मिलियन मीट्रिक टन) का लगभग 3.37 प्रतिशत है, जो अंतरराष्ट्रीय कॉटन बाजार में भारत की महत्वपूर्ण निर्यातक के रूप में भूमिका को दर्शाता है।

भारत दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में कॉटन का निर्यात करता है, जो भारतीय कपास की मजबूत और विविध वैश्विक मांग को दर्शाता है।

मूल्य के आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कॉटन निर्यात 11.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

भारतीय कॉटन से बने कपड़ों और तैयार उत्पादों के निर्यात के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा, जिसकी हिस्सेदारी 26.35 प्रतिशत रही। इसके बाद बांग्लादेश की हिस्सेदारी 19.81 प्रतिशत और श्रीलंका की 5.11 प्रतिशत रही।

अन्य प्रमुख निर्यात गंतव्यों में यूनाइटेड किंगडम (2.38 प्रतिशत) और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) (2.32 प्रतिशत) शामिल रहे।

निर्यात का यह पैटर्न भारतीय कॉटन की विविध वैश्विक मांग को रेखांकित करता है।

भारत में कॉटन का उत्पादन मुख्य रूप से 9 प्रमुख राज्यों में केंद्रित है, जिन्हें तीन एग्रो-इकोलॉजिकल जोन में बांटा गया है। उत्तरी क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान, मध्य क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश और दक्षिणी क्षेत्र में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का नाम शामिल हैं।

इन राज्यों के अलावा ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है।

–आईएएनएस

एबीएस

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