नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्य, जो पिछले महीने भाजपा में शामिल हो गए थे, अगर उनमें पर्याप्त साहस होता तो वे पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ सकते थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मान ने कहा कि अगर हमारे दस में से सात सांसद एक साथ आकर कहते हैं कि उन्होंने किसी दूसरी पार्टी में विलय कर लिया है, तो यह सिर्फ उनकी मर्जी से नहीं हो सकता। देश में कानून हैं और संविधान के अनुसार ही काम होना चाहिए। या तो पूरी पार्टी का विलय हो जाता, या फिर अगर उन्होंने प्रस्ताव पेश किया होता तो इसे स्वीकार किया जा सकता था।
मान ने आगे कहा कि अगर उन्हें (सात सांसदों को) आम आदमी पार्टी इतनी नापसंद थी, तो उन्हें सीधे इस्तीफा दे देना चाहिए था और भाजपा के टिकट पर कहीं और से चुनाव लड़ लेना चाहिए था। हम भी अपने सात प्रतिनिधि (चुनाव लड़ने के लिए) भेजते। मैंने राष्ट्रपति को बताया है कि पंजाब में लोकतंत्र कैसे मजाक बन गया है। फिलहाल पंजाब में भाजपा के 2 निर्वाचित विधायक हैं, और अब राज्य से उनके 6 राज्यसभा सांसद हैं। क्या यह संविधान का मजाक नहीं है?
दलबदल करने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से निर्वाचित हुए थे।
मुख्यमंत्री मान ने सात सांसदों की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए और आम आदमी पार्टी को उन सात सीटों पर दोबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अगर दोबारा बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है, तो संशोधन लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने इस बारे में राष्ट्रपति से बात की है, उन्होंने संविधान विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद मुझे वापस बुलाने का आश्वासन दिया है।
एक कार्यक्रम के दौरान, पंजाब के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर क्षेत्रीय दलों को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज मेरी मुलाकात राष्ट्रपति से हुई। मैंने उनसे कहा कि वे (भाजपा) क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म कर रहे हैं।
–आईएएनएस
एमएस/
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