तिरुवनंतपुरम में सीपीआई-एम में बड़ी फूट, जॉय के टिके रहने से शिवनकुट्टी नाराज

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तिरुवनंतपुरम, 10 जून (आईएएनएस)। केरल की राजधानी में सीपीआई-एम के अंदर गुटीय लड़ाई और तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने तिरुवनंतपुरम जिला सचिव के तौर पर वी. जॉय को बनाए रखने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। शिवनकुट्टी बुधवार को जिले की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पार्टी के उस फैसले पर उनकी नाराजगी जाहिर हुई, जिसके तहत जॉय को इस अहम पद पर वापस लाया जा रहा है। सीपीआई-एम नेतृत्व ने हाल ही में यह तय किया था कि जॉय, जो विधायक भी हैं, वह जिला सचिव के…

तिरुवनंतपुरम, 10 जून (आईएएनएस)। केरल की राजधानी में सीपीआई-एम के अंदर गुटीय लड़ाई और तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने तिरुवनंतपुरम जिला सचिव के तौर पर वी. जॉय को बनाए रखने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।

शिवनकुट्टी बुधवार को जिले की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पार्टी के उस फैसले पर उनकी नाराजगी जाहिर हुई, जिसके तहत जॉय को इस अहम पद पर वापस लाया जा रहा है।

सीपीआई-एम नेतृत्व ने हाल ही में यह तय किया था कि जॉय, जो विधायक भी हैं, वह जिला सचिव के पद पर बने रहेंगे।

यह फैसला तिरुवनंतपुरम जिले के सीपीआई-एम राज्य समिति सदस्यों की एक अहम बैठक में लिया गया, जो पार्टी के राज्य सचिव एमवी. गोविंदन की अगुवाई में एकेजी सेंटर में हुई थी।

पी. विजयन समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। जॉय ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सचिव का पद कुछ समय के लिए छोड़ दिया था और राज्यसभा सांसद एए रहीम ने अंतरिम जिला सचिव का पद संभाला था।

सीपीआई(एम) की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधायक आमतौर पर जिला सचिव का पद छोड़ देते हैं। हालांकि, तिरुवनंतपुरम यूनिट के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों ने मामले को जटिल बना दिया है।

ताजा विवाद शिवनकुट्टी की बदलती राजनीतिक स्थिति से भी जुड़ा है, जिन्हें कभी राजधानी जिले में सीपीआई-एम के सबसे बड़े नेताओं में से एक माना जाता था।

हाल ही में हुए चुनाव में शिवनकुट्टी अपनी नेमोम विधानसभा सीट भाजपा के राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार गए।

विधायक की सीट और मंत्री का पद, दोनों ही हाथ से निकल जाने के बाद, शिवनकुट्टी तिरुवनंतपुरम जिला सचिव का पद पाने के इच्छुक थे। सीपीआई-एम की 14 जिला कमेटियों में से इस पद को सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक पदों में से एक माना जाता है।

इस पद पर रहने वाले व्यक्ति का राज्य की राजधानी में पार्टी के कामकाज पर काफी नियंत्रण होता है। हालांकि, नेतृत्व का जॉय को ही पद पर बनाए रखने का फैसला उन लोगों के लिए निराशाजनक रहा होगा जो जिला स्तर पर बदलाव की उम्मीद कर रहे थे।

–आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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