नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने 37.5 लाख रुपए की “खुद रची गई” लूट की घटना को 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पीड़ित कंपनी के दो कर्मचारी भी शामिल हैं और लूटी गई लगभग पूरी रकम बरामद कर ली है।
नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस की ओर से बताया गया कि यह मामला एक एडवरटाइजिंग और अखबार पब्लिशिंग कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर रची गई साजिश से जुड़ा है। उन्होंने क्लाइंट्स से इकट्ठा किए गए कैश को ले जाते समय लूट का नाटक किया था।
पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन में तीन आरोपियों अभिषेक (26), योगेश (26) और विपिन (29) को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी आरोपियों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वजीराबाद पुलिस स्टेशन और स्पेशल स्टाफ/नॉर्थ की संयुक्त टीमों ने 24 घंटे के भीतर पीड़ित कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा 37.5 लाख रुपए की लूट के नाटक का पर्दाफाश किया।
बताया गया कि लूट की लगभग पूरी रकम बरामद कर ली गई है और पुलिस ने 36.92 लाख रुपए, चार मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, 9 जुलाई को एक पीसीआर कॉल मिली थी जिसमें बताया गया था कि आउटर रिंग रोड पर बुराड़ी फ्लाईओवर के पास मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने 37.5 लाख रुपए से भरा बैग लूट लिया।
शिकायतकर्ता मोहन दास ने पुलिस को बताया कि उन्होंने और उनके साथियों अभिषेक और योगेश ने चांदनी चौक से 45.5 लाख रुपए इकट्ठा किए थे, जिन्हें उनके मालिक के सरस्वती विहार स्थित घर पहुंचाना था। जहां मोहन दास और अभिषेक एक मोटरसाइकिल पर 37.5 लाख रुपए ले जा रहे थे, वहीं योगेश दूसरी मोटरसाइकिल पर 8 लाख रुपए ले जा रहा था।
पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ताओं का दावा था कि तीन अज्ञात लोगों ने उनकी मोटरसाइकिल को रोका, कैश वाला बैग छीना और भाग गए। उनके बयान के अनुसार, लुटेरों में से एक को आम लोगों की मदद से पकड़ लिया गया था, लेकिन बाद में वह भाग निकला। हालांकि, जांच के दौरान जांचकर्ताओं को शक हुआ।
वजीराबाद पुलिस स्टेशन और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की एक संयुक्त टीम ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की और कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच के दौरान, अधिकारियों को अभिषेक और योगेश के बयानों में विसंगतियां मिली।
पुलिस ने बताया कि जिस मोबाइल फोन के बारे में कर्मचारियों ने दावा किया था कि भागते हुए आरोपी उसे ले गए थे, वह असल में उनकी मोटरसाइकिल के स्टोरेज कंपार्टमेंट से बरामद हुआ। जांच करने वालों को यह भी पता चला कि योगेश के कंधे पर चोट का जो निशान बताया जा रहा था, वह असली नहीं लग रहा था, जिससे पुलिस को बताई गई मनगढ़ंत कहानी का पर्दाफाश हो गया।
लगातार पूछताछ के दौरान, अभिषेक और योगेश ने कथित तौर पर लूट की साजिश रचने की बात कबूल की और बताया कि उन्होंने विपिन के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। विपिन उनका करीबी साथी था जो पहले रोहिणी में एक कैफे चलाता था।
पुलिस ने बताया कि तकनीकी जांच से पुष्टि हुई कि जब कैश इकट्ठा किया जा रहा था, तब विपिन चांदनी चौक में मौजूद था।
इसके बाद जांच करने वालों ने विपिन को यह यकीन दिलाकर जाल बिछाया कि उसके साथी पुलिस की नज़र से बच निकले हैं और पैसे में अपना हिस्सा मांग रहे हैं। इस झांसे में आकर विपिन ने जहांगीरपुरी में अपनी लोकेशन बता दी, जहां 10 जुलाई को भागने की कोशिश करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
उसके घर की तलाशी लेने पर 36.92 लाख रुपए नकद बरामद हुए।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने लूट की योजना तब बनाई थी जब अभिषेक और योगेश, जो अपने मालिक के लिए अक्सर बड़ी मात्रा में कैश ले जाते थे, उसने विपिन के साथ इस बारे में चर्चा की थी। चांदनी चौक से कैश कलेक्शन का रूट पता लगाने के बाद, तीनों ने लूट को अंजाम देने के लिए तीन और साथियों को शामिल किया था।
पुलिस ने बताया कि जब कथित लुटेरों में से एक को लोगों ने पकड़ लिया, तो अभिषेक और योगेश ने उसे पुलिस के हवाले करने के बजाय जानबूझकर भागने दिया और बाद में यह मनगढ़ंत कहानी बनाई कि भागने से पहले उसने योगेश को चोट पहुंचाई।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि साजिश में शामिल बाकी आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आगे की जांच चल रही है।
–आईएएनएस
डीकेएम/डीएससी
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